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गरीब विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट दे शिक्षा बोर्ड : संघ
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Education Board should give exemption in examination fee to poor students: Union
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बड़सर (हमीरपुर)। प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने हाल ही में टर्म परीक्षाओं के शेड्यूल और परीक्षा शुल्कों की अधिसूचना जारी की है। इन परीक्षा शुल्कों में गरीब बच्चों को विशेष छूट देने की मांग राजकीय टीजीटी कला शिक्षक संघ ने बोर्ड अध्यक्ष और सचिव से की है। संघ प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल, उपाध्यक्ष मदन लाल, महासचिव विजय हीर, डेलीगेट संजय ठाकुर ने संयुक्त रूप से विद्यार्थी हित में समस्त गरीब तबके के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस मैट्रिक और जमा दो कक्षा के लिए कम करने की मांग की है।
बोर्ड ने दसवीं में हर टर्म परीक्षा के लिए फीस 500 रुपये, जमा दो के लिए 600 प्रति टर्म और 200 रुपये माइग्रेशन फीस, कक्षा आठवीं, नौंवी और जमा एक के लिए 150 रुपये प्रति टर्म और कक्षा तीन और पांच के लिए 100 रुपये फीस तय की है। संघ ने बोर्ड से केंद्र रिटेंशन फीस में भी गरीब बच्चों को राहत देने की मांग उठाई है। संघ के महासचिव विजय हीर ने कहा कि कक्षा तीन, पांच और आठ के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस देने के लिए स्टार्स प्रोजेक्ट के तहत फंडिंग को एसएसए के तहत विचार-विमर्श करना चाहिए, ताकि आरटीई एक्ट के तहत मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान का भी सम्मान हो। इसके अलावा अक्षम बच्चों के लिए अलग पेपर और अतिरिक्त समय भी देने के लिए विचार किया जाए।
संघ ने सेमेस्टर प्रणाली इस सत्र से लागू करने का मुद्दा 11 जुलाई को भी उठाया था। अगर उस समय कार्रवाई होती तो यह प्रणाली अब तक निर्विरोध लागू हो जाती। संघ ने इस व्यवस्था में साल में दो बार पेपर लेते हुए परीक्षा का कठिनाई स्तर कम रखने की अपील की है और दूसरी टर्म परीक्षा अप्रैल में लेने की अपील की है। इसके अलावा बोर्ड को 10 सूत्रीय सुझाव भी संघ ने बैठक से पूर्व प्रेषित किए हैं, ताकि बच्चों पर पाठ्यक्रम का बोझ घटाया जाए और परीक्षाएं सरल हों।
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बोर्ड ने दसवीं में हर टर्म परीक्षा के लिए फीस 500 रुपये, जमा दो के लिए 600 प्रति टर्म और 200 रुपये माइग्रेशन फीस, कक्षा आठवीं, नौंवी और जमा एक के लिए 150 रुपये प्रति टर्म और कक्षा तीन और पांच के लिए 100 रुपये फीस तय की है। संघ ने बोर्ड से केंद्र रिटेंशन फीस में भी गरीब बच्चों को राहत देने की मांग उठाई है। संघ के महासचिव विजय हीर ने कहा कि कक्षा तीन, पांच और आठ के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस देने के लिए स्टार्स प्रोजेक्ट के तहत फंडिंग को एसएसए के तहत विचार-विमर्श करना चाहिए, ताकि आरटीई एक्ट के तहत मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान का भी सम्मान हो। इसके अलावा अक्षम बच्चों के लिए अलग पेपर और अतिरिक्त समय भी देने के लिए विचार किया जाए।
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संघ ने सेमेस्टर प्रणाली इस सत्र से लागू करने का मुद्दा 11 जुलाई को भी उठाया था। अगर उस समय कार्रवाई होती तो यह प्रणाली अब तक निर्विरोध लागू हो जाती। संघ ने इस व्यवस्था में साल में दो बार पेपर लेते हुए परीक्षा का कठिनाई स्तर कम रखने की अपील की है और दूसरी टर्म परीक्षा अप्रैल में लेने की अपील की है। इसके अलावा बोर्ड को 10 सूत्रीय सुझाव भी संघ ने बैठक से पूर्व प्रेषित किए हैं, ताकि बच्चों पर पाठ्यक्रम का बोझ घटाया जाए और परीक्षाएं सरल हों।
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