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Hamirpur (Himachal) News: मातृभाषा में शिक्षा और कौशल विकास से उच्च शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
Mon, 12 Oct 2026 01:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:20 AM IST
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हमीरपुर। मातृभाषा में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा का पाठ्यक्रम में समावेश और कौशल विकास उच्च शिक्षा को नई दिशा दे सकते हैं। एनआईटी हमीरपुर में शिक्षा महाकुंभ के छठे संस्करण के तहत आयोजित शैक्षणिक संगोष्ठी में देशभर से पहुंचे कुलपतियों, निदेशकों और शिक्षाविदों ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की आवश्यकता जताई।
एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. हीरालाल मुरलीधर सूर्यवंशी ने मातृभाषा में अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के कुलपति प्रो. संजीव जैन ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के साथ मौलिक अकादमिक साहित्य भी तैयार किया जाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल बंसल ने डोगरी सहित अन्य भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने और स्कूली शिक्षा को उच्च शिक्षा और उद्योगों से जोड़ने की जरूरत बताई।
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पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेयी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा और आईआईएम रोहतक के डॉ. प्रणब धरमणी ने भारतीय भाषाओं व ज्ञान परंपराओं को शोध और अकादमिक अध्ययन में उचित स्थान देने की बात कही।
वहीं, आईआईटी रोपड़ के निदेशक ने तकनीकी दक्षता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। हसन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टीसी तारानाथ और वीआईटी के डॉ. मिथिलेश दुबे ने व्यावहारिक शिक्षण व वास्तविक जीवन पर आधारित प्रश्नों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली में सुधार, जबकि पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ. विशाल शर्मा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पढ़ाई के साथ कमाई के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।
आईआईएम अहमदाबाद की डॉ. सोनी गोयल ने शिक्षकों के स्व-मूल्यांकन को जरूरी बताया। वहीं, विद्या भारती के पदाधिकारियों ने शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय और नई शिक्षण पद्धतियां अपनाने की वकालत की।
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एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. हीरालाल मुरलीधर सूर्यवंशी ने मातृभाषा में अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के कुलपति प्रो. संजीव जैन ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के साथ मौलिक अकादमिक साहित्य भी तैयार किया जाना चाहिए।
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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल बंसल ने डोगरी सहित अन्य भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने और स्कूली शिक्षा को उच्च शिक्षा और उद्योगों से जोड़ने की जरूरत बताई।
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पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेयी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा और आईआईएम रोहतक के डॉ. प्रणब धरमणी ने भारतीय भाषाओं व ज्ञान परंपराओं को शोध और अकादमिक अध्ययन में उचित स्थान देने की बात कही।
वहीं, आईआईटी रोपड़ के निदेशक ने तकनीकी दक्षता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। हसन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टीसी तारानाथ और वीआईटी के डॉ. मिथिलेश दुबे ने व्यावहारिक शिक्षण व वास्तविक जीवन पर आधारित प्रश्नों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली में सुधार, जबकि पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ. विशाल शर्मा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पढ़ाई के साथ कमाई के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।
आईआईएम अहमदाबाद की डॉ. सोनी गोयल ने शिक्षकों के स्व-मूल्यांकन को जरूरी बताया। वहीं, विद्या भारती के पदाधिकारियों ने शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय और नई शिक्षण पद्धतियां अपनाने की वकालत की।