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सीएसडी कैंटीन : सुबह मिलने वाले सामान के लिए रात को ही रख दिए बैग
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ऊपर रख दिए पत्थर, सामान लेने के लिए अपनी बारी सुनिश्चित करने का प्रयास
दाड़ला गांव में स्थित सीएसडी कैंटीन में दिखा ऐसा दृश्य
कैंटीन में दिया जाता है सैनिकों, पूर्व सैनिकों और आश्रितों को सामान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। सीएसडी कैंटीन में सामान लेने के दौरान कोई होड़ न हो, इसका तोड़ लाभार्थियों ने निकाल लिया है। सीएसडी कैंटीन में हर माह की पहली तारीख को सामान मिलता है। सुबह सामान लेने में कोई दिक्कत न हो तथा सामान जल्दी मिले, इसके लिए कुछ लाभार्थियों ने बीती रात को ही अपने बैग सहित लिफाफे कैंटीन के सामने रख दिए। बैग व लिफाफों पर पत्थर भी रख दिए ताकि ये हवा से उड़ न जाएं। बैग और लिफाफे रखकर लाभार्थियों की ओर से सामान लेने के लिए अपनी बारी को सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। मामला सुजानपुर टीहरा के अंतर्गत गांव दाड़ला में स्थित सीएसडी कैंटीन का है। यहां पर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को विभिन्न सामान मिलता है। आरट्रेक ईएसएम कैंटीन एक्स काॅउंटर में एक अक्तूबर को भी पहले की भांति लाभार्थियों को सामान दिया गया लेकिन, लाभार्थियों की ओर से सुबह अपनी बारी को सबसे पहले सुनिश्चित करने के लिए 30 अक्तूबर की रात को ही अपने कुछ बैग और कुछ लिफाफों पर पत्थर रख दिए ताकि सुबह सबसे पहले उन्हें कैंटीन का सामान मिल जाए। सुबह पंक्तियों में लगकर लाभार्थियों ने टोकन लिया। टोकन में बताया गया कि सामान लेने के लिए किस लाभार्थी का नंबर कब आएगा। कुछ लाभार्थी सामान लेने के लिए सुबह 3 से 4 बजे भी कैंटीन पहुंच जाते हैं और सुबह कैंटीन के खुलने का इंतजार करते हैं। सीएसडी कैंटीन का लाभ सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की ओर से लिया जाता है। सीएसडी कैंटीन में मिलने वाला सामान बाजार की कीमत से कम दाम पर मिलता है। कैंटीन में ग्रॉसरी, किचन अप्लायंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, शराब, ऑटोमोबाइल, प्रसाधन सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू जरूरतों के सामान आदि दिया जाता है।
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दाड़ला गांव में स्थित सीएसडी कैंटीन में दिखा ऐसा दृश्य
कैंटीन में दिया जाता है सैनिकों, पूर्व सैनिकों और आश्रितों को सामान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। सीएसडी कैंटीन में सामान लेने के दौरान कोई होड़ न हो, इसका तोड़ लाभार्थियों ने निकाल लिया है। सीएसडी कैंटीन में हर माह की पहली तारीख को सामान मिलता है। सुबह सामान लेने में कोई दिक्कत न हो तथा सामान जल्दी मिले, इसके लिए कुछ लाभार्थियों ने बीती रात को ही अपने बैग सहित लिफाफे कैंटीन के सामने रख दिए। बैग व लिफाफों पर पत्थर भी रख दिए ताकि ये हवा से उड़ न जाएं। बैग और लिफाफे रखकर लाभार्थियों की ओर से सामान लेने के लिए अपनी बारी को सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। मामला सुजानपुर टीहरा के अंतर्गत गांव दाड़ला में स्थित सीएसडी कैंटीन का है। यहां पर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को विभिन्न सामान मिलता है। आरट्रेक ईएसएम कैंटीन एक्स काॅउंटर में एक अक्तूबर को भी पहले की भांति लाभार्थियों को सामान दिया गया लेकिन, लाभार्थियों की ओर से सुबह अपनी बारी को सबसे पहले सुनिश्चित करने के लिए 30 अक्तूबर की रात को ही अपने कुछ बैग और कुछ लिफाफों पर पत्थर रख दिए ताकि सुबह सबसे पहले उन्हें कैंटीन का सामान मिल जाए। सुबह पंक्तियों में लगकर लाभार्थियों ने टोकन लिया। टोकन में बताया गया कि सामान लेने के लिए किस लाभार्थी का नंबर कब आएगा। कुछ लाभार्थी सामान लेने के लिए सुबह 3 से 4 बजे भी कैंटीन पहुंच जाते हैं और सुबह कैंटीन के खुलने का इंतजार करते हैं। सीएसडी कैंटीन का लाभ सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की ओर से लिया जाता है। सीएसडी कैंटीन में मिलने वाला सामान बाजार की कीमत से कम दाम पर मिलता है। कैंटीन में ग्रॉसरी, किचन अप्लायंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, शराब, ऑटोमोबाइल, प्रसाधन सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू जरूरतों के सामान आदि दिया जाता है।