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Hamirpur (Himachal) News: चेक बाउंस मामले में दोषी को 15 दिन के लिए जेल भेजा
Thu, 18 Dec 2025 01:11 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 18 Dec 2025 01:11 AM IST
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हमीरपुर। चेक बाउंस के एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 15 दिन की साधारण कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी को 30 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में शिकायतकर्ता को अदा करने के आदेश दिए हैं।
मुआवजे की राशि जमा न करने की स्थिति में आरोपी को सात दिन की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। यह फैसला मनु प्रिंजा, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बड़सर ने सुनाया है। मामले के अनुसार शिकायतकर्ता नवदीप कुमार, निवासी बड़सर ने अदालत में याचिका दायर की थी कि आरोपी निवासी सरकाघाट (मंडी) ने व्यवसायिक लेनदेन के तहत 30 हजार रुपये का चेक जारी किया था।
अप्रैल 2017 को यह व्यावसायिक लेनदेन हुआ था। इस दौरान चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बैंक खाते में पैसा न होने की वजह से बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता की ओर से नियमानुसार कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन न तो चेक की राशि अदा की गई और न ही नोटिस का कोई जवाब दिया गया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा।
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मुकदमे में बैंक अधिकारियों समेत तीन गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 10 दिसंबर को अदालत ने सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चेक बाउंस सामाजिक-आर्थिक अपराध है और ऐसे मामलों में प्रोबेशन का लाभ नहीं दे सकते, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। संवाद
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मुआवजे की राशि जमा न करने की स्थिति में आरोपी को सात दिन की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। यह फैसला मनु प्रिंजा, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बड़सर ने सुनाया है। मामले के अनुसार शिकायतकर्ता नवदीप कुमार, निवासी बड़सर ने अदालत में याचिका दायर की थी कि आरोपी निवासी सरकाघाट (मंडी) ने व्यवसायिक लेनदेन के तहत 30 हजार रुपये का चेक जारी किया था।
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अप्रैल 2017 को यह व्यावसायिक लेनदेन हुआ था। इस दौरान चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बैंक खाते में पैसा न होने की वजह से बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता की ओर से नियमानुसार कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन न तो चेक की राशि अदा की गई और न ही नोटिस का कोई जवाब दिया गया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा।
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मुकदमे में बैंक अधिकारियों समेत तीन गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 10 दिसंबर को अदालत ने सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चेक बाउंस सामाजिक-आर्थिक अपराध है और ऐसे मामलों में प्रोबेशन का लाभ नहीं दे सकते, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। संवाद