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Hamirpur (Himachal) News: विवादों में निर्माण, ट्रस ब्रिज हादसे की जांच करेगी केंद्रीय समिति
Sat, 03 Oct 2026 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:35 AM IST
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कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। शिमला-मटौर फोरलेन के चीलबाहल-कोहली टूलेन बाईपास पर मसयाणा के पास निर्माणाधीन ट्रस ब्रिज का हिस्सा गिरने के बाद अब इस पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से बनाए जा रहे 90 मीटर लंबे ट्रस ब्रिज की लॉन्चिंग के दौरान शुक्रवार को हुए हादसे में एक मजदूर को जान से हाथ धोना पड़ा, जबकि कई चोटिल हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्तर पर तीन सदस्यीय समिति हादसे की जांच करेगी।
समिति यह पता लगाएगी कि ट्रस की लॉन्चिंग के दौरान किस स्तर पर चूक हुई। यह पहला मौका नहीं है, जब इस हिस्से का निर्माण सवालों में आया हो। करीब डेढ़ साल से यहां पुल का निर्माण चल रहा है, लेकिन काम की रफ्तार लगातार चर्चा में रही है। पिछले साल पुल निर्माण के दौरान कुनाह खड्ड के बहाव को रोकने तक के आरोप लगे। खड्ड में कन्वर्ट डाल दिए गए थे, जिनसे बेहद कम मात्रा में पानी निकल पा रहा था। इस जुगाड़ के सहारे यहां निर्माण कार्य कर रही कंपनी की ओर से वाहन और मशीनरी उतारे गए थे, लेकिन जब बरसात में खड्ड का जलस्तर बढ़ा तो डाली गई मिट्टी और कन्वर्ट बह गए और वाहन व मशीनरी यहीं फंस गए। कई माह तक वाहन जंग खाकर यहीं खराब होते रहे, जिन्हें अभी तक निकाला नहीं जा सका है। संवाद
टूलेन पैच भी दे चुका है जवाब
फोरलेन के इस हिस्से में टूलेन पैच कई जगहों पर धंस चुका है। ऐसे में अब ट्रस ब्रिज हादसे के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पुराने सवाल फिर सामने आ गए हैं। मसयाणा के पास पहाड़ के खतरे को देखते हुए एक घर को पहले ही खाली करवाया जा चुका है। इससे इस हिस्से में निर्माण के दौरान सुरक्षा प्रबंधों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चीलबाहल-कोहली बाईपास के इस हिस्से को पहले इसी साल की शुरुआत में यातायात के लिए बहाल करने की योजना थी। बाद में दिसंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन लगातार सामने आ रही तकनीकी और निर्माण संबंधी दिक्कतों के कारण समय पर काम पूरा होना चुनौती बन गया है। शुक्रवार को ट्रस ब्रिज की लॉन्चिंग के दौरान हुआ हादसा इस देरी को और बढ़ा सकता है।
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कोट
मंत्रालय को नियमों के तहत मामले की जानकारी दी गई है। जल्द ही तीन सदस्यीय जांच समिति मामले की जांच के लिए मौके पर आएगी। सोमवार तक कमेटी के आने की संभावना है। यह पता लगाया जाएगा कि किस स्तर पर यह चूक हुई है। -राकेश यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआई हमीरपुर
बाहर हूं। शनिवार को साइट पर पहुंच रहा हूं। इस बारे में अभी अधिक नहीं बता सकता हूं। -जहांगीर हसन, जीएम, झंडू कंस्ट्रक्शन
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हमीरपुर। शिमला-मटौर फोरलेन के चीलबाहल-कोहली टूलेन बाईपास पर मसयाणा के पास निर्माणाधीन ट्रस ब्रिज का हिस्सा गिरने के बाद अब इस पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से बनाए जा रहे 90 मीटर लंबे ट्रस ब्रिज की लॉन्चिंग के दौरान शुक्रवार को हुए हादसे में एक मजदूर को जान से हाथ धोना पड़ा, जबकि कई चोटिल हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्तर पर तीन सदस्यीय समिति हादसे की जांच करेगी।
समिति यह पता लगाएगी कि ट्रस की लॉन्चिंग के दौरान किस स्तर पर चूक हुई। यह पहला मौका नहीं है, जब इस हिस्से का निर्माण सवालों में आया हो। करीब डेढ़ साल से यहां पुल का निर्माण चल रहा है, लेकिन काम की रफ्तार लगातार चर्चा में रही है। पिछले साल पुल निर्माण के दौरान कुनाह खड्ड के बहाव को रोकने तक के आरोप लगे। खड्ड में कन्वर्ट डाल दिए गए थे, जिनसे बेहद कम मात्रा में पानी निकल पा रहा था। इस जुगाड़ के सहारे यहां निर्माण कार्य कर रही कंपनी की ओर से वाहन और मशीनरी उतारे गए थे, लेकिन जब बरसात में खड्ड का जलस्तर बढ़ा तो डाली गई मिट्टी और कन्वर्ट बह गए और वाहन व मशीनरी यहीं फंस गए। कई माह तक वाहन जंग खाकर यहीं खराब होते रहे, जिन्हें अभी तक निकाला नहीं जा सका है। संवाद
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टूलेन पैच भी दे चुका है जवाब
फोरलेन के इस हिस्से में टूलेन पैच कई जगहों पर धंस चुका है। ऐसे में अब ट्रस ब्रिज हादसे के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पुराने सवाल फिर सामने आ गए हैं। मसयाणा के पास पहाड़ के खतरे को देखते हुए एक घर को पहले ही खाली करवाया जा चुका है। इससे इस हिस्से में निर्माण के दौरान सुरक्षा प्रबंधों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चीलबाहल-कोहली बाईपास के इस हिस्से को पहले इसी साल की शुरुआत में यातायात के लिए बहाल करने की योजना थी। बाद में दिसंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन लगातार सामने आ रही तकनीकी और निर्माण संबंधी दिक्कतों के कारण समय पर काम पूरा होना चुनौती बन गया है। शुक्रवार को ट्रस ब्रिज की लॉन्चिंग के दौरान हुआ हादसा इस देरी को और बढ़ा सकता है।
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मंत्रालय को नियमों के तहत मामले की जानकारी दी गई है। जल्द ही तीन सदस्यीय जांच समिति मामले की जांच के लिए मौके पर आएगी। सोमवार तक कमेटी के आने की संभावना है। यह पता लगाया जाएगा कि किस स्तर पर यह चूक हुई है। -राकेश यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआई हमीरपुर
बाहर हूं। शनिवार को साइट पर पहुंच रहा हूं। इस बारे में अभी अधिक नहीं बता सकता हूं। -जहांगीर हसन, जीएम, झंडू कंस्ट्रक्शन