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सीटू ने मनाया काला दिवस, कार्यकर्ताओं ने घर पर किया प्रदर्शन
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हमीरपुर। सीटू से जुड़े 2000 से ज्यादा मजदूरों ने कोविड नियमों का पालन करते हुए 26 मई को काले दिवस के रूप में मनाया। विभिन्न कार्यस्थलों और अपने-अपने घरों व गांव में ये प्रदर्शन किए गए। सीटू के जिला सचिव जोगिंद्र कुमार ने कहा कि 26 मई को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हुए। साथ ही देश के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के भी 6 माह पूरे हुए। इस समयावधि में मोदी ने जनता को मौत के मुंह और देश को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा किया है। देश में हजारों लोग बेमौत मर रहे हैं, लाखों लोग रोज संक्रमित हो रहे हैं। जिसके लिए मोदी सरकार ही जिम्मेदार है। लाखों लोगों को रैलियों में शामिल किया तो कभी कुंभ जैसे मेलों का आयोजन करके लाखों लोगों की भीड़ जुटाई।
जिससे महामारी ने विकराल रूप ले लिया। सरकार बेशर्मी से देश में मजदूरों व किसानों को दबाने में लगी है। इस महामारी का फायदा उठाकर मजदूरों, किसानों से जुड़े कानूनों को बदल दिया है। हिमाचल सरकार ने बीते हफ्ते में काम के घंटे 8 से 12 करने की अधिसूचना भी जारी कर दी है। ये कानून मजदूरों व किसानों को गुलाम बनाने का मसौदा मात्र है। जिसको सीटू कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता है। संगठन मांग करता है कि सभी का इलाज मुफ्त में किया जाए। सबको मुफ्त में वैक्सीन लगाई जाए। सबको घरों तक महामारी चलने तक मुफ्त राशन व आर्थिक मदद दी जाए। केरल में जहां वामपंथी सरकार है ये सुविधाएं अपने लोगों को दे सकती है तो हिमाचल सरकार क्यों नहीं। सीटू मांग करता है कि अस्पतालों में तुरंत आक्सीजन व वेंटिलेटर की व्यवस्था की जाए। डॉक्टरों, नर्सों व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती अविलंब की जाए।
महामारी के चलते लोगों को हुए आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए। जब देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों को 20 लाख करोड़ का सहायता पैकेज दिया जा सकता है तो देशवासियों को क्यों नहीं। संगठन मांग करता है कि प्रत्येक परिवार को 7500 रुपये प्रतिमाह आर्थिक मदद दी जाए। मनरेगा के कार्य कोविड नियमों की पालना करते हुए शुरू किए जाएं। किसानों व मजदूरों के लिए बनाए गए नए कानूनों को रद्द किया जाए। सरकार ने अगर मांगें न मानीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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जिससे महामारी ने विकराल रूप ले लिया। सरकार बेशर्मी से देश में मजदूरों व किसानों को दबाने में लगी है। इस महामारी का फायदा उठाकर मजदूरों, किसानों से जुड़े कानूनों को बदल दिया है। हिमाचल सरकार ने बीते हफ्ते में काम के घंटे 8 से 12 करने की अधिसूचना भी जारी कर दी है। ये कानून मजदूरों व किसानों को गुलाम बनाने का मसौदा मात्र है। जिसको सीटू कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता है। संगठन मांग करता है कि सभी का इलाज मुफ्त में किया जाए। सबको मुफ्त में वैक्सीन लगाई जाए। सबको घरों तक महामारी चलने तक मुफ्त राशन व आर्थिक मदद दी जाए। केरल में जहां वामपंथी सरकार है ये सुविधाएं अपने लोगों को दे सकती है तो हिमाचल सरकार क्यों नहीं। सीटू मांग करता है कि अस्पतालों में तुरंत आक्सीजन व वेंटिलेटर की व्यवस्था की जाए। डॉक्टरों, नर्सों व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती अविलंब की जाए।
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महामारी के चलते लोगों को हुए आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए। जब देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों को 20 लाख करोड़ का सहायता पैकेज दिया जा सकता है तो देशवासियों को क्यों नहीं। संगठन मांग करता है कि प्रत्येक परिवार को 7500 रुपये प्रतिमाह आर्थिक मदद दी जाए। मनरेगा के कार्य कोविड नियमों की पालना करते हुए शुरू किए जाएं। किसानों व मजदूरों के लिए बनाए गए नए कानूनों को रद्द किया जाए। सरकार ने अगर मांगें न मानीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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