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हर्षोल्लास से मनाया ईद-उल-जुहा का पर्व
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हमीरपुर में ईद पर एक-दूसरे को मुबारकबाद देते मुस्लिम समुदाय के बच्चे।
- फोटो : Hamirpur-HP
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रंगस/हमीरपुर। जिले भर में बुधवार को ईद-उल-जुहा को धूमधाम से मनाया। मस्जिदों और घरों में सुबह आठ बजे नमाज अता की। रंगस पंचायत के तहत बन्ह गांव में बुधवार को समुदाय के लोगों ने बुधवार की सुबह नमाज अता करने के बाद हर्षोल्लास के साथ ईद-उल-जुहा का त्यौहार मनाया। इस पर्व को ईद-उल-जुहा के अलावा ईद-उल-अजहा और बकरीद के नाम से भी जाना जाता है।
ईद उल फितर के बाद मुस्लिम धर्म में बकरीद के नाम से मनाया जाता है। जिला मुस्लिम संघ के नेता जान मोहम्मद, इस्लामदीन, रफीक मोहम्मद और मुनीर हुसैन ने कहा कि परंपरा के अनुसार मोहम्मद पैगंबर साहिब को अल्लाह ने संदेशवाहक के रूप में समुदाय के बीच में भेजा था। फिर मोहम्मद पैगंबर की परीक्षा लेने की मंशा से उनको अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने के लिए कहा था।
उन्होंने अपने बालक को हलाल करने का प्रयास किया तो एकदम से अचानक चाकू के नीचे से बालक को हटाकर एक दुंबा नामक जीभ चाकू के नीचे आकर हलाल हो गया। इसी को खुदा ने सच्ची कुर्बानी के रूप में स्वीकार कर लिया। उसी दिन से बकरे को हलाल कर कुर्बानी दी जाती है और त्योहार को बकरीद के नाम से मनाया जाता है। समुदाय के लोग अपने ही घर में पाला हुआ और स्वस्थ एक साल से कम उम्र के बकरे को हलाल किया जाता है। उसके बाद उसके हलाल किए हुए मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है।
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उनमें एक हिस्सा कुर्बानी देने वाला अपने स्वयं के लिए रख लेता है तथा दो हिस्से रिश्तेदारों और समुदाय के गरीब परिवारों को बांट दिए जाते हैं। आमतौर पर कई बार एक मोहल्ले में धाम की तरह ही आपस में एक दूसरे को परोसा जाता है। बुधवार से शुरू होने वाला यह पर्व शुक्रवार शाम तक चलेगा। उधर, भाजपा अल्पसंख्य मोर्चा के जिलाध्यक्ष जीदीन ने बताया बकरीद को जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया।
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ईद उल फितर के बाद मुस्लिम धर्म में बकरीद के नाम से मनाया जाता है। जिला मुस्लिम संघ के नेता जान मोहम्मद, इस्लामदीन, रफीक मोहम्मद और मुनीर हुसैन ने कहा कि परंपरा के अनुसार मोहम्मद पैगंबर साहिब को अल्लाह ने संदेशवाहक के रूप में समुदाय के बीच में भेजा था। फिर मोहम्मद पैगंबर की परीक्षा लेने की मंशा से उनको अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने के लिए कहा था।
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उन्होंने अपने बालक को हलाल करने का प्रयास किया तो एकदम से अचानक चाकू के नीचे से बालक को हटाकर एक दुंबा नामक जीभ चाकू के नीचे आकर हलाल हो गया। इसी को खुदा ने सच्ची कुर्बानी के रूप में स्वीकार कर लिया। उसी दिन से बकरे को हलाल कर कुर्बानी दी जाती है और त्योहार को बकरीद के नाम से मनाया जाता है। समुदाय के लोग अपने ही घर में पाला हुआ और स्वस्थ एक साल से कम उम्र के बकरे को हलाल किया जाता है। उसके बाद उसके हलाल किए हुए मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है।
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उनमें एक हिस्सा कुर्बानी देने वाला अपने स्वयं के लिए रख लेता है तथा दो हिस्से रिश्तेदारों और समुदाय के गरीब परिवारों को बांट दिए जाते हैं। आमतौर पर कई बार एक मोहल्ले में धाम की तरह ही आपस में एक दूसरे को परोसा जाता है। बुधवार से शुरू होने वाला यह पर्व शुक्रवार शाम तक चलेगा। उधर, भाजपा अल्पसंख्य मोर्चा के जिलाध्यक्ष जीदीन ने बताया बकरीद को जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया।

ादौन के बन्ह गांव में ईद-उल-जुहा के पर्व पर नमाज अता करते हुए।- फोटो : Hamirpur-HP