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Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल कॉलेज में डेढ़ माह से कैल्शियम-विटामिन डी की गोलियां खत्म
Wed, 06 May 2026 12:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 06 May 2026 12:55 AM IST
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हमीरपुर। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में करीब डेढ़ महीने से कैल्शियम और विटामिन डी की गोलियों का स्टॉक खत्म है, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हड्डियों, जोड़ों के दर्द और कमजोरी से जूझ रहे मरीजों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 1000 से 1500 ओपीडी होती है। ऑर्थोपेडिक और जनरल मेडिसिन विभाग में सैकड़ों मरीजों को चिकित्सक नियमित रूप से कैल्शियम और विटामिन डी की दवाएं लिखते हैं, लेकिन स्टॉक खत्म होने के कारण मरीजों को इन्हें बाहर मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवाई खरीदना पड़ रही है।
दवाइयों की कमी न केवल मरीजों की आर्थिक और शारीरिक परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रेक्चर का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में इन दवाइयों की नियमित उपलब्धता बेहद जरूरी है।
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ओपीडी पर्ची शुल्क के बाद भी नहीं सुधरे हालात
मरीजों ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन की ओर से ओपीडी पर्ची शुल्क दस रुपये लिया जाता है। उम्मीद थी कि पर्ची शुल्क की राशि से दवाइयों की कमी नहीं होगी। लेकिन अब भी दवाइयों की कमी से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित की जाए।
कोट
दवा आपूर्ति कंपनियों को दवाइयों के ऑर्डर कर दिए हैं। जल्द ही मरीजों को पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध होंगी। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
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कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 1000 से 1500 ओपीडी होती है। ऑर्थोपेडिक और जनरल मेडिसिन विभाग में सैकड़ों मरीजों को चिकित्सक नियमित रूप से कैल्शियम और विटामिन डी की दवाएं लिखते हैं, लेकिन स्टॉक खत्म होने के कारण मरीजों को इन्हें बाहर मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवाई खरीदना पड़ रही है।
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दवाइयों की कमी न केवल मरीजों की आर्थिक और शारीरिक परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रेक्चर का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में इन दवाइयों की नियमित उपलब्धता बेहद जरूरी है।
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ओपीडी पर्ची शुल्क के बाद भी नहीं सुधरे हालात
मरीजों ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन की ओर से ओपीडी पर्ची शुल्क दस रुपये लिया जाता है। उम्मीद थी कि पर्ची शुल्क की राशि से दवाइयों की कमी नहीं होगी। लेकिन अब भी दवाइयों की कमी से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित की जाए।
कोट
दवा आपूर्ति कंपनियों को दवाइयों के ऑर्डर कर दिए हैं। जल्द ही मरीजों को पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध होंगी। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर