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औषधीय पौधों की खेती करने के लिए वित्तीय सहायता देगा बोर्ड
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रंगस (नादौन)। जिले के किसानों को राज्य औषधीय पादप बोर्ड औषधीय पौधों की खेती करने के लिए प्रति हेक्टेयर वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। बोर्ड के जिला नोडल अधिकारी डॉ. रविंद्र शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के किसानों को औषधीय पौधों की खेती करने पर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य औषधीय पादप बोर्ड के माध्यम से वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। उन्होंने हमीरपुर के किसानों को औषधीय पौधों की खेती करने के लिए प्रेरित किया है। बताया कि इस योजना का लाभ गरीब से गरीब किसान तथा भूमिहीन गरीब व्यक्ति भी ले सकता है। इसके लिए कम से कम 2 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि का होना क्लस्टर के लिए अनिवार्य है।
कम भूमि वाला या भूमिहीन किसान भी एक क्लस्टर बनाकर औषधीय पौधों की खेती कर सकता है। इसमें 3 गांवों के लोग एक क्लस्टर बनाकर औषधीय पौधों की खेती कर सकते हैं। यह क्लस्टर 15 किलोमीटर के अंदर किन्हीं भी 3 गांवों के लोगों का भी हो सकता है। विशेष प्रकार के औषधीय पौधों की खेती के लिए राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने यह मुहिम छेड़ रखी है। इसमें आतिश, कुटकी, कुठ, सुगंध बाला, अश्वगंधा, सर्पगंधा तथा तुलसी 7 किस्म के औषधीय पौधों की खेती करने पर प्रदेश सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
जिसमें आतिश पर प्रति हेक्टेयर 120785 रुपये, कुटकी पर प्रति हेक्टेयर 123530 रुपये, कुठ के लिए प्रति हेक्टेयर 96080 रुपये, सुगंध बाला प्रति हेक्टेयर 93925 रुपये, अश्वगंधा प्रति हेक्टेयर 10977 रुपये, सर्पगंधा प्रति हेक्टेयर 45742 रुपये तथा तुलसी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 13171 रुपये वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पहले तीन औषधीय पौधे पहाड़ी तथा बर्फानी इलाके में उगाए जा सकते हैं, लेकिन अंतिम के 4 औषधीय पौधों से जिला हमीरपुर में ठीक-ठाक पैदावार ली जा सकती है। इन औषधीय पौधों के लिए जिला हमीरपुर की मिट्टी उपयुक्त पाई गई है।
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कम भूमि वाला या भूमिहीन किसान भी एक क्लस्टर बनाकर औषधीय पौधों की खेती कर सकता है। इसमें 3 गांवों के लोग एक क्लस्टर बनाकर औषधीय पौधों की खेती कर सकते हैं। यह क्लस्टर 15 किलोमीटर के अंदर किन्हीं भी 3 गांवों के लोगों का भी हो सकता है। विशेष प्रकार के औषधीय पौधों की खेती के लिए राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने यह मुहिम छेड़ रखी है। इसमें आतिश, कुटकी, कुठ, सुगंध बाला, अश्वगंधा, सर्पगंधा तथा तुलसी 7 किस्म के औषधीय पौधों की खेती करने पर प्रदेश सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
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जिसमें आतिश पर प्रति हेक्टेयर 120785 रुपये, कुटकी पर प्रति हेक्टेयर 123530 रुपये, कुठ के लिए प्रति हेक्टेयर 96080 रुपये, सुगंध बाला प्रति हेक्टेयर 93925 रुपये, अश्वगंधा प्रति हेक्टेयर 10977 रुपये, सर्पगंधा प्रति हेक्टेयर 45742 रुपये तथा तुलसी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 13171 रुपये वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पहले तीन औषधीय पौधे पहाड़ी तथा बर्फानी इलाके में उगाए जा सकते हैं, लेकिन अंतिम के 4 औषधीय पौधों से जिला हमीरपुर में ठीक-ठाक पैदावार ली जा सकती है। इन औषधीय पौधों के लिए जिला हमीरपुर की मिट्टी उपयुक्त पाई गई है।
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