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Hamirpur (Himachal) News: बड़ा अस्पताल, ईसीजी मशीनें दस, तकनीशियन एक भी नहीं
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चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों से करवाए जा रहे हैं अस्पताल में ईसीजी टेस्ट
रात को ईसीजी के लिए होती है परेशानी, कई बार चिकित्सकों को खुद करने पड़ रहे टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले के सबसे बड़े डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ईसीजी की मशीनें तो दस हैं लेकिन तकनीशियन एक भी तैनात नहीं किया गया है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। इससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकाल में तो दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। अन्य विभागों के कर्मचारियों से ईसीजी टेस्ट का कार्य करवाया जा रहा है। इससे मेडिकल कॉलेज की साख पर सवाल उठ रहे हैं। अगर ईसीजी करते समय कुछ गड़बड़ी हो जाए तो मरीज की जान पर बन आएगी। हर वार्ड में ईसीजी मशीन है लेकिन किसी भी वार्ड में तकनीशियन नहीं है। आपातकाल में चिकित्सक स्वयं ही ईसीजी करते हैं।
सरकार ने अभी तक अस्पताल में तकनीशियन की नियुक्ति नहीं की है। वहीं, अस्पताल में अन्य स्टाफ सहित करीब 150 पद खाली हैं। अस्पताल के हर विभाग में व्यवस्था चरमराई हुई है। कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल में तैनात अन्य कर्मचारियों पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों से वर्ग तीन का कार्य लिया जा रहा है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि रिक्त पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को बताया गया है। जल्द मरीजों की समस्या को हल किया जाएगा।
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रात को ईसीजी के लिए होती है परेशानी, कई बार चिकित्सकों को खुद करने पड़ रहे टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले के सबसे बड़े डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ईसीजी की मशीनें तो दस हैं लेकिन तकनीशियन एक भी तैनात नहीं किया गया है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। इससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकाल में तो दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। अन्य विभागों के कर्मचारियों से ईसीजी टेस्ट का कार्य करवाया जा रहा है। इससे मेडिकल कॉलेज की साख पर सवाल उठ रहे हैं। अगर ईसीजी करते समय कुछ गड़बड़ी हो जाए तो मरीज की जान पर बन आएगी। हर वार्ड में ईसीजी मशीन है लेकिन किसी भी वार्ड में तकनीशियन नहीं है। आपातकाल में चिकित्सक स्वयं ही ईसीजी करते हैं।
सरकार ने अभी तक अस्पताल में तकनीशियन की नियुक्ति नहीं की है। वहीं, अस्पताल में अन्य स्टाफ सहित करीब 150 पद खाली हैं। अस्पताल के हर विभाग में व्यवस्था चरमराई हुई है। कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल में तैनात अन्य कर्मचारियों पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों से वर्ग तीन का कार्य लिया जा रहा है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि रिक्त पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को बताया गया है। जल्द मरीजों की समस्या को हल किया जाएगा।
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