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Hamirpur (Himachal) News: श्रीराम और लक्ष्मण से मिलने वन पहुंचे भरत और शत्रुघ्न
Tue, 30 Sep 2025 01:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 30 Sep 2025 01:35 AM IST
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नादौन में चल रही श्री रामलीला के मंचन के दौरान दर्शाए गए दृश्य में अभिनय करते हुए कलाकार : स्र
नादौन (हमीरपुर)। ननिहाल से अयोध्या पहुंचने पर भरत और शत्रुघ्न श्रीराम, लक्ष्मण और सीता काे महल में न पाकर बेचैन हो जाते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि राम को वनवास दे दिया है, तो वे उन्हें मनाने के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
नादौन में चल रही रामलीला में बुधवार को दर्शाए गए भरत मिलाप के दृश्य को देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस दौरान दोनों भाई वन में भटकते हुए राम के पास पहुंचते हैं, तो लक्ष्मण कहते हैं कि भरत कहीं हम पर सेना लेकर हमला करने तो नहीं आ रहा है। भगवान राम ने समझाया कि वह हमारी सुध लेने आया होगा।
इसके बाद भरत और राम के मिलाप का दृश्य देख दर्शकों की आखें नम हो गईं। जब राम को पता चला कि पिता का स्वर्गवास हो गया है तो उन्होंने भरत को घर जाने को कहा, लेकिन भरत ने अकेले जाने से मना कर दिया। श्रीराम के समझाने पर वह उनकी पादुकाएं अपने साथ ले गए।
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इसके बाद बाली-सुग्रीव युद्ध का मंचन किया गया। दूसरे मंचन में शूर्पणखा की नाक काटने के दृश्य का मंचन किया गया। नाक काटने के दर्द से कराहती हुई वह अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंची। इसके बाद भगवान राम ने खर और दूषण का वध कर दिया।
फिर सीता हरण का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद राम-लक्ष्मण जब पंचवटी कुटिया में पहुंचे तो सारा मामला समझ आ गया। सीता को ढूंढते हुए उन्हें जटायु मिलते हैं, जिन्होंने बताया कि रावण माता सीता को लंका ले गया है।
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नादौन में चल रही रामलीला में बुधवार को दर्शाए गए भरत मिलाप के दृश्य को देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस दौरान दोनों भाई वन में भटकते हुए राम के पास पहुंचते हैं, तो लक्ष्मण कहते हैं कि भरत कहीं हम पर सेना लेकर हमला करने तो नहीं आ रहा है। भगवान राम ने समझाया कि वह हमारी सुध लेने आया होगा।
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इसके बाद भरत और राम के मिलाप का दृश्य देख दर्शकों की आखें नम हो गईं। जब राम को पता चला कि पिता का स्वर्गवास हो गया है तो उन्होंने भरत को घर जाने को कहा, लेकिन भरत ने अकेले जाने से मना कर दिया। श्रीराम के समझाने पर वह उनकी पादुकाएं अपने साथ ले गए।
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इसके बाद बाली-सुग्रीव युद्ध का मंचन किया गया। दूसरे मंचन में शूर्पणखा की नाक काटने के दृश्य का मंचन किया गया। नाक काटने के दर्द से कराहती हुई वह अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंची। इसके बाद भगवान राम ने खर और दूषण का वध कर दिया।
फिर सीता हरण का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद राम-लक्ष्मण जब पंचवटी कुटिया में पहुंचे तो सारा मामला समझ आ गया। सीता को ढूंढते हुए उन्हें जटायु मिलते हैं, जिन्होंने बताया कि रावण माता सीता को लंका ले गया है।