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Hamirpur (Himachal) News: जागरुकता रैली निकाल दिया भूकंप से बचाव का संदेश
Sat, 05 Apr 2025 06:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 05 Apr 2025 06:38 AM IST
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हमीरपुर। वर्ष 1905 में जिला कांगड़ा और इसके आसपास के क्षेत्रों में आए भीषण भूकंप की 120वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर आम लोगों को भूकंप जैसी आपदा से बचाव के लिए जागरूक किया। शुक्रवार सुबह हमीरपुर जिला मुख्यालय में एक ‘एकता मार्च’ निकाला गया।
इस अवसर पर गांधी चौकी पर एकत्रित अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आम लोगों को संबोधित करते हुए एसडीएम संजीत सिंह ने कहा कि चार अप्रैल 1905 को जिला कांगड़ा और इसके आसपास के क्षेत्र में भीषण भूकंप आया था, जिसमें 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और लगभग एक लाख मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए थे। संजीत सिंह ने कहा कि 120 वर्ष पहले इस क्षेत्र में घनी आबादी नहीं थी और बहुमंजिला इमारतें भी नहीं थीं लेकिन आज के दौर में अगर उतनी ही तीव्रता का भूकंप आ जाए तो वर्ष 1905 के मुकाबले कई गुणा ज्यादा नुकसान हो सकता है। इसलिए, भूकंप जैसी त्रासदी से बचाव के लिए आम लोगों में जागरुकता बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आज के दिन कांगड़ा की भूकंप त्रासदी के मृतकों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ हमें आपदा से बचाव एवं जागरुकता का संकल्प भी लेना चाहिए। एसडीएम ने कहा कि भूकंप ऐसी आपदा है, जिसे न तो रोका जा सकता है और न ही इसके बारे में कोेई पुख्ता पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
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इस अवसर पर एसडीएम ने गांधी चौक से ही ‘एकता मार्च’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली गांधी चौक से मुख्य बाजार से गुजरते हुए तहसील चौक से वापस उपायुक्त कार्यालय परिसर संपन्न हुई। इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अलावा कई अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आम लोगों ने भी भाग लिया।
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इस अवसर पर गांधी चौकी पर एकत्रित अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आम लोगों को संबोधित करते हुए एसडीएम संजीत सिंह ने कहा कि चार अप्रैल 1905 को जिला कांगड़ा और इसके आसपास के क्षेत्र में भीषण भूकंप आया था, जिसमें 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और लगभग एक लाख मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए थे। संजीत सिंह ने कहा कि 120 वर्ष पहले इस क्षेत्र में घनी आबादी नहीं थी और बहुमंजिला इमारतें भी नहीं थीं लेकिन आज के दौर में अगर उतनी ही तीव्रता का भूकंप आ जाए तो वर्ष 1905 के मुकाबले कई गुणा ज्यादा नुकसान हो सकता है। इसलिए, भूकंप जैसी त्रासदी से बचाव के लिए आम लोगों में जागरुकता बहुत जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि आज के दिन कांगड़ा की भूकंप त्रासदी के मृतकों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ हमें आपदा से बचाव एवं जागरुकता का संकल्प भी लेना चाहिए। एसडीएम ने कहा कि भूकंप ऐसी आपदा है, जिसे न तो रोका जा सकता है और न ही इसके बारे में कोेई पुख्ता पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
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इस अवसर पर एसडीएम ने गांधी चौक से ही ‘एकता मार्च’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली गांधी चौक से मुख्य बाजार से गुजरते हुए तहसील चौक से वापस उपायुक्त कार्यालय परिसर संपन्न हुई। इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अलावा कई अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आम लोगों ने भी भाग लिया।

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