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भाजपा को उसी के मोहरे से मात देने की जुगत
Hamirpur
Updated Tue, 26 Mar 2013 05:32 AM IST
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सुजानपुर (हमीरपुर)। राजेंद्र राणा की कांग्रेस सरकार के साथ नजदीकियों को लेकर राजनीतिक नफा नुकसान के आंकलन भी शुरू हो गए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि राणा को साथ लेकर चलने में कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में लाभ मिलेगा, और भाजपा को इसका नुकसान हो सकता है। कांग्रेस लोकसभा चुनावों को लेकर रणनीति पर कार्य कर रही है, तथा कभी भाजपा के खास माने जाने वाले राजेंद्र राणा के सहारे हमीरपुर में भाजपा को ही मात देने की जुगत में है। हमीरपुर में कांग्रेस के लिए राहें आसान नहीं रही हैं, शायद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह लोस चुनावों में भाजपा के मोहरे से भाजपा को उसी के घर में घेरकर मात देना चाहते हैं। यही कारण माना जा सकता है कि राणा को साथ लेने का इशारा कर दिया है।
राणा ने विस चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी को ही 14 हजार मतों से पटखनी दी थी। केवल एसोसिएट मेंबर नहीं, कयास यहां तक लगाए जा रहे हैं कि राजेंद्र राणा को लोस चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी भी बनाया जा सकता है। दूसरी ओर राणा जनता से सेवा का वादा करके विस पहुंचे हैं और जनता से किए वायदे को पूरा करने के लिए राणा को सरकार का साथ चाहिए होगा, सरकार से दूर रहकर काम नहीं चल पाएगा। शायद इन्हीं परिस्थितियों के चलते कांग्रेस के नजदीक राणा पहुंचे हैं। सारी स्थिति में भाजपा को हमीरपुर में नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। खैर, पुख्ता तौर पर तो लोकसभा चुनाव परिणामों के पश्चात ही कहा जा सकेगा कि राजेंद्र राणा के कांग्रेस के साथ आने से कितना फायदा और भाजपा से दूर जाने पर किसे कितना नुकसान हुआ। राजेंद्र राणा ने होली मेले के शुभारंभ पर कांग्रेस को भी पीछे धकेल दिया था।
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राणा ने विस चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी को ही 14 हजार मतों से पटखनी दी थी। केवल एसोसिएट मेंबर नहीं, कयास यहां तक लगाए जा रहे हैं कि राजेंद्र राणा को लोस चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी भी बनाया जा सकता है। दूसरी ओर राणा जनता से सेवा का वादा करके विस पहुंचे हैं और जनता से किए वायदे को पूरा करने के लिए राणा को सरकार का साथ चाहिए होगा, सरकार से दूर रहकर काम नहीं चल पाएगा। शायद इन्हीं परिस्थितियों के चलते कांग्रेस के नजदीक राणा पहुंचे हैं। सारी स्थिति में भाजपा को हमीरपुर में नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। खैर, पुख्ता तौर पर तो लोकसभा चुनाव परिणामों के पश्चात ही कहा जा सकेगा कि राजेंद्र राणा के कांग्रेस के साथ आने से कितना फायदा और भाजपा से दूर जाने पर किसे कितना नुकसान हुआ। राजेंद्र राणा ने होली मेले के शुभारंभ पर कांग्रेस को भी पीछे धकेल दिया था।
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