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बिटिया की डॉक्टरी की राह में गरीबी बन गई बाधा
Updated Tue, 10 Jul 2018 11:56 PM IST
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर की होनहार बिटिया के डॉक्टर बनने के सपने में उसकी परिवार की माली आर्थिक हालत बाधा बन गई है। भोटा की रहने वाली आंचल शुक्ला के पिता दर्जी का काम करते हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। बचपन से पढ़ाई लिखाई में होनहार आंचल ने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर जवाहर नवोदय विद्यालय डुंगरी में दाखिला पाया था।
जेएनवी से बारहवीं की परीक्षा विज्ञान संकाय में 92 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद नीट परीक्षा में भी आंचल ने मेरिट में स्थान पाया। जिसके बाद आंचल का दाखिला डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा कांगड़ा में हुआ। कक्षाएं अगस्त माह से शुरू हो रही हैं, लेकिन आंचल के माता-पिता के पास इतनी जमापूंजी नहीं है कि वह बेटी की डॉक्टरी की पढ़ाई का खर्चा उठा सकें। मंगलवार को आंचल और उसके पिता प्रवीण कुमार ने उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा से मुलाकात कर अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में अवगत करवाया। आंचल ने उपायुक्त से गुहार लगाई कि वह डॉक्टर बनना चाहती हैं, लेकिन परिजनों के पास उसकी पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं। इसलिए प्रदेश सरकार या प्रशासन कहीं से उसकी मदद करे। उधर, उपायुक्त रिचा वर्मा का कहना है कि आंचल और उसके पिता उनसे मिले हैं लेकिन, प्रशासन के पास कोई फंड नहीं है।
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जेएनवी से बारहवीं की परीक्षा विज्ञान संकाय में 92 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद नीट परीक्षा में भी आंचल ने मेरिट में स्थान पाया। जिसके बाद आंचल का दाखिला डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा कांगड़ा में हुआ। कक्षाएं अगस्त माह से शुरू हो रही हैं, लेकिन आंचल के माता-पिता के पास इतनी जमापूंजी नहीं है कि वह बेटी की डॉक्टरी की पढ़ाई का खर्चा उठा सकें। मंगलवार को आंचल और उसके पिता प्रवीण कुमार ने उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा से मुलाकात कर अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में अवगत करवाया। आंचल ने उपायुक्त से गुहार लगाई कि वह डॉक्टर बनना चाहती हैं, लेकिन परिजनों के पास उसकी पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं। इसलिए प्रदेश सरकार या प्रशासन कहीं से उसकी मदद करे। उधर, उपायुक्त रिचा वर्मा का कहना है कि आंचल और उसके पिता उनसे मिले हैं लेकिन, प्रशासन के पास कोई फंड नहीं है।
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