{"_id":"5baa7e58867a557f721c28b1","slug":"51537900120-hamirpur-hp-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाटरशेड को नहीं बजट, मनरेगा के तहत होंगे शेष कार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाटरशेड को नहीं बजट, मनरेगा के तहत होंगे शेष कार्य
Updated Tue, 25 Sep 2018 11:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। प्रदेश में वाटरशेड योजनाओं को अब बजट नहीं मिलेगा। प्रदेशभर में चल रहे या शेष बचे वाटरशेड के कार्यों को अब मनरेगा के तहत पूरा किया जाएगा। इन योजनाओं को बजट न मिलने के कारण अब ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा के तहत शेष बचे कार्यों को पूरा करवाएगा। इसके तहत मनरेगा मजदूरी और मैटीरियल का पैसा वाटरशेड योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। प्रदेशभर में वाटरशेड योजनाओं के दर्जनों कार्य पेंडिंग पड़े हैं। अब इन कार्यों को पूरा करने के लिए सरकार वाटरशेड योजनाओं के तहत पैसा नहीं देगी। कार्यों में चेकडैम, सिंचाई योजनाओं सहित अन्य कार्य शेष बचे हुए हैं। कई जिलों में ऐसे कार्य पूर्व के बजट से पूरे नहीं हुए हैं, जबकि उनकी समयावधि समाप्त हो चुकी है।
समयावधि पूरी होने के बाद और शेष बचे कार्यों के लिए बजट न होने के कारण ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इन बचे कार्यों को मनरेगा के तहत करवाने का फैसला लिया है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और पेंडिंग पड़े वाटरशेड योजना के कार्य भी पूरे हो जाएंगे। इस संबंध में पीओ डीआरडीए हमीरपुर सुनील चंदेल का कहना है कि मनरेगा के तहत अब वाटरशेड योजनाओं के शेष बचे कार्य पूरे किए जाएंगे। इन योजनाओं के कई कार्य शेष पड़े हैं जिनके लिए अब बजट का प्रावधान नहीं है। इस कारण विभाग ने इन कार्यों को मनरेगा के तहत करवाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
समयावधि पूरी होने के बाद और शेष बचे कार्यों के लिए बजट न होने के कारण ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इन बचे कार्यों को मनरेगा के तहत करवाने का फैसला लिया है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और पेंडिंग पड़े वाटरशेड योजना के कार्य भी पूरे हो जाएंगे। इस संबंध में पीओ डीआरडीए हमीरपुर सुनील चंदेल का कहना है कि मनरेगा के तहत अब वाटरशेड योजनाओं के शेष बचे कार्य पूरे किए जाएंगे। इन योजनाओं के कई कार्य शेष पड़े हैं जिनके लिए अब बजट का प्रावधान नहीं है। इस कारण विभाग ने इन कार्यों को मनरेगा के तहत करवाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन