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मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की लापरवाही से नवजात की मौत

Mon, 27 Aug 2018 11:23 PM IST
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:23 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की लापरवाही से नवजात की मौत
- फोटो : amar ujala
हमीरपुर। डॉ. राधा कृष्णनन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में एक गर्भवती महिला के प्रसव के दौरान बरती गई लापरवाही से नवजात की मौत हो गई। गर्भवती महिला के भाई शुभम धीमान का आरोप है कि पैरा मेडिकल स्टाफ की लापरवाही और गर्भवती महिला के पेट को घुटने से दबाने के कारण नवजात की मौत हुई है। पीड़ित महिला गांव दांदडू, तहसील बिझड़, जिला हमीरपुर की रहने वाली है। वह लंबे समय से अपने पति के साथ उत्तराखंड में रहती है।
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प्रसव के लिए वह हमीरपुर अस्पताल में आई थीं। 21 अगस्त को स्त्री रोग विशेषज्ञ ने गर्भवती के सारे टेस्ट करवाने के बाद ही उसे अस्पताल में भर्ती किया था। 22 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश के चलते अस्पताल में कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। शुभम धीमान ने बताया कि 22 अगस्त की शाम को उसकी बहन को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। जिसके बाद रात दस बजे नर्स उसे प्रसूति कक्ष में ले गई। लेकिन, प्रसूति कक्ष में कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। शुभम ने बताया कि रात 11 बजे के बाद अत्यधिक पीड़ा होने के बावजूद प्रसूति कक्ष में उसे अकेला रखा गया। इसके बाद वहीं पर अस्पताल की एक महिला कर्मचारी मौके पर आई और उसने अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। महिला कर्मचारी ने दीपिका के पेट पर अपने घुटने से अत्यधिक जोर लगाया, जिससे पेट में दबाव बन गया। गर्भवती की गंभीर स्थिति के बावजूद कोई चिकित्सक नहीं आया। रात एक बजे महिला कर्मचारी और स्टाफ नर्स दोनों ने उसकी बहन के साथ दुर्व्यवहार किया और जबरदस्ती प्रसव करवाने का प्रयास किया गया। सुबह करीब तीन बजे स्त्री रोग विशेषज्ञ को मौके पर बुलाया गया। लेकिन, तब तक गर्भवती महिला का नाड़ू बाहर आ गया और नवजात की पेट में ही मौत हो चुकी थी। पीड़िता के परिजनों ने कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. अनिल चौहान, स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा और सीएमओ हमीरपुर को शिकायत की प्रति भेज मामले की जांच की गुहार लगाई है ताकि, भविष्य में किसी अन्य गर्भवती महिला से इस प्रकार की घटना न हो।
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जब तक सूचना मिली, नवजात की हो चुकी थी मौत : अध्यक्ष
गायनी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश शामा ने कहा कि मामला उनके ध्यान में आया है। उन्होंने कहा कि मौके पर तैनात चिकित्सक का कहना है कि जब पैरामेडिकल स्टाफ ने उन्हें सूचना दी तब तक गर्भवती महिला का नाड़ू बाहर आ चुका था और बच्चे की गर्भ में मौत हो चुकी थी। डॉ. शामा ने बताया कि महिला का नाड़ू बाहर आने पर भी अगर समय पर उपचार शुरू हो जाए तो मां और नवजात दोनों को बचाया जा सकता है।
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मामला ध्यान में नहीं : चिकित्सा अधीक्षक
वहीं, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला को कॉलेज प्रधानाचार्य से इस मामले की शिकायत करनी चाहिए। इसके बाद ही जांच शुरू हो सकती है।
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