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दुराचार मामले में छात्रों ने निकाली रोष रैली

Fri, 16 Feb 2018 09:56 PM IST
Updated Fri, 16 Feb 2018 09:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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हमीरपुर। जिले के एक निजी कॉलेज में छात्रा के साथ हुए दुराचार मामले में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के सभी छात्रों ने निजी कॉलेज के गेट तक रैली निकाली। इस दौरान एसएफआई के राज्य उपप्रधान संजीव सेठी ने कहा कि प्रदेश में अभी गुड़िया दुराचार केस की गुत्थी सुलझी नहीं है और ऐसे मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। निजी कॉलेज में अध्यापक की ओर से छात्रा के साथ दुराचार करना गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते को तार-तार करता है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। वहीं, एनएसयूआई इकाई बड़सर ने भी कॉलेज में छात्रा से हुए दुराचार के मामले में महाविद्यालय में धरना-प्रदर्शन किया। एनएसयूआई प्रदेश महासचिव रूबल ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में आए दिन हो रही इस तरह की वारदातों से देवभूमि की छवि खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में पीड़ित छात्रा के साथ इंसाफ में किसी भी प्रकार की कोताही बरती गई तो छात्रों का प्रदर्शन कॉलेज से निकल कर सड़कों पर आ जाएगा। एसएफआई इकाई नादौन ने भी हमीरपुर में हुए छात्रा के साथ दुराचार सहित शाहपुर, भोरंज और नेरवा में चार मासूम लड़कियों के साथ हुए दुराचार और मर्डर की घटनाओं के खिलाफ शहर भर में रैली निकाल कर विरोध जताया। इस आक्रोश रैली के उपरांत उन्होंने एसडीएम नादौन को एक ज्ञापन सौंप कर आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने और महिलाओं तथा लड़कियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। उधर, भारत की जनवादी नौजवान सभा की राज्य इकाई ने जिले के एक निजी कॉलेज में छात्रा के साथ हुए दुराचार की कड़ी निंदा की है। सभा के प्रदेशाध्यक्ष अनिल मनकोटिया ने कहा कि यह मामला तभी प्रकाश में आया, जब पीड़िता ने एसएफआई सदस्यों के साथ संपर्क किया। उसके बाद पीड़िता के परिजनों और कॉलेज के अन्य छात्रों ने आरोपी को कॉलेज में ही धर दबोचा। उन्होंने कहा कि इस मामले को कॉलेज प्रबंधन की ओर से दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन छात्रों ने इस मामले को दबने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाल ही में दुराचार और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के मामलों में वृद्धि हुई है जो सीधे तौर पर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते हैं। भारत की जनवादी नौजवान सभा ने मांग की है कि शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं का अध्यापकों द्वारा इंटरनल असेस्मेंट के नाम पर मानसिक और शारीरिक शोषण बंद किया जाए।
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