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Hamirpur (Himachal) News: 20 साल पुरानी मशीन फिर निकालेगी पथरी
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मेडिकल कॉलेज में दो वर्ष से खराब पड़ी थी, दोबारा करवाया मरम्मत कार्य
अस्पताल में दो वर्षों से चीरा लगाकर किए जा रहे थे मरीजों के ऑपरेशन
चिकित्सकों को झेलनी पड़ रही थी खासी परेशानी, मरीज भी कर रहे थे गुरेज
काम चलाऊ हुई मशीन, अभी तक नहीं मिली नई मशीन
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ.राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में फिर से लेप्रोस्कोपिक मशीन के माध्यम से पथरी के ऑपरेशन होना शुरू हो गए हैं। दो वर्ष बाद दोबारा मशीन से ऑपरेशन हो रहे हैं। 20 वर्ष पुरानी मशीन को काम चलाने योग्य किया गया है। अस्पताल में करीब दो वर्ष से हाथों से चीरा लगाकर ऑपरेशन किए जा रहे थे। इससे चिकित्सकों को भी परेशानी हो रही थी और मरीज भी चीरा लगाकर ऑपरेशन करवाने से गुरेज कर रहे थे। मरीज बाहर निजी अस्पतालों में ही ऑपरेशन करवाने को तरजीह दे रहे थे।
चीरा लगाने से हुए ऑपरेशन में दर्द भी अधिक होता है और पस पड़ने का भी खतरा बना रहता है। ऐेसे में मरीज अस्पताल में ऑपरेशन करवाने से गुरेज कर रहे थे। अस्पताल में औसतन एक दिन में पथरी के आठ से 10 ऑपरेशन किए जाते हैं। ऐसे में चीरा लगाकर ऑपरेशन करना मुश्किल हो रहा था। इस कारण अब पुरानी मशीन को दोबारा से कार्य करने योग्य बनाया गया है। अब मरीजों को थोड़ी राहत मिलेगी। मरीजों सुजाता, कृष्णा, संतोष, राजेश आदि ने कहा कि यहां पर मशीन से टेस्ट नहीं हो पा रहे थे। अब दोबारा से यह सुविधा मिल रही है। इस बारे में प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि मशीन से दोबारा ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं।
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अस्पताल में दो वर्षों से चीरा लगाकर किए जा रहे थे मरीजों के ऑपरेशन
चिकित्सकों को झेलनी पड़ रही थी खासी परेशानी, मरीज भी कर रहे थे गुरेज
काम चलाऊ हुई मशीन, अभी तक नहीं मिली नई मशीन
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ.राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में फिर से लेप्रोस्कोपिक मशीन के माध्यम से पथरी के ऑपरेशन होना शुरू हो गए हैं। दो वर्ष बाद दोबारा मशीन से ऑपरेशन हो रहे हैं। 20 वर्ष पुरानी मशीन को काम चलाने योग्य किया गया है। अस्पताल में करीब दो वर्ष से हाथों से चीरा लगाकर ऑपरेशन किए जा रहे थे। इससे चिकित्सकों को भी परेशानी हो रही थी और मरीज भी चीरा लगाकर ऑपरेशन करवाने से गुरेज कर रहे थे। मरीज बाहर निजी अस्पतालों में ही ऑपरेशन करवाने को तरजीह दे रहे थे।
चीरा लगाने से हुए ऑपरेशन में दर्द भी अधिक होता है और पस पड़ने का भी खतरा बना रहता है। ऐेसे में मरीज अस्पताल में ऑपरेशन करवाने से गुरेज कर रहे थे। अस्पताल में औसतन एक दिन में पथरी के आठ से 10 ऑपरेशन किए जाते हैं। ऐसे में चीरा लगाकर ऑपरेशन करना मुश्किल हो रहा था। इस कारण अब पुरानी मशीन को दोबारा से कार्य करने योग्य बनाया गया है। अब मरीजों को थोड़ी राहत मिलेगी। मरीजों सुजाता, कृष्णा, संतोष, राजेश आदि ने कहा कि यहां पर मशीन से टेस्ट नहीं हो पा रहे थे। अब दोबारा से यह सुविधा मिल रही है। इस बारे में प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि मशीन से दोबारा ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं।
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