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हमीरपुर में निकाली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा
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हमीरपुर। चैतन्य प्रभु गौडीय मठ की तरफ से हमीरपुर में हर साल की तरह वीरवार को भी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। रथयात्रा का शुभारंभ गौडीय मठ के त्रिदंडी भक्ति प्रसाद विष्णु और सत्य नारायण मंदिर के महंत राकेश दास ने किया। रथयात्रा में मुख्य रूप से आनंदपुर से श्रीनिधि, वृंदावन से वासुदेव, गोपाल दास, नित्य केशव दास, बामन, जनार्दन, श्रीपाद गौरांग दास ब्रह्मचारी, बंसी दास ब्रह्मचारी भाग ले रहे हैं।
चैतन्य महाप्रभु मठ डंगरी के सचिव गिरी ने बताया कि हमीरपुर में यह रथ यात्रा सबसे लंबी 18 किलोमीटर की है। जगन्नाथ का रथ हमीरपुर से डंगरी मठ तक जाता है। वीरवार को ही स्थानीय सत्य नारायण मंदिर में पिछले सात दिनों से चल रही भागवत कथा का समापन भी हुआ। इस अवसर पर व्यास गद्दी पर विराजमान गौडीय मठ के भक्ति प्रसाद विष्णु ने बताया कि जगन्नाथ रथ यात्रा में भाग लेने वाला जन्म-जन्म के चक्कर से मुक्त हो जाता है। भगवान जगन्नाथ को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना गया है।
इनकी महिमा का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों एवं पुराणों में मिलता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ (भगवान श्रीकृष्ण) उनके भाई बलराम (बलभद्र) और बहन सुभद्रा रथयात्रा के मुख्य आराध्य होते हैं। जो इस रथयात्रा में शामिल होकर रथ को खींचते हैं, उन्हें सौ यज्ञ के बराबर पुण्य लाभ मिलता है। रथयात्रा के दौरान हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं एवं रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। जगन्नाथ यात्रा हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। यात्रा में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं।
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चैतन्य महाप्रभु मठ डंगरी के सचिव गिरी ने बताया कि हमीरपुर में यह रथ यात्रा सबसे लंबी 18 किलोमीटर की है। जगन्नाथ का रथ हमीरपुर से डंगरी मठ तक जाता है। वीरवार को ही स्थानीय सत्य नारायण मंदिर में पिछले सात दिनों से चल रही भागवत कथा का समापन भी हुआ। इस अवसर पर व्यास गद्दी पर विराजमान गौडीय मठ के भक्ति प्रसाद विष्णु ने बताया कि जगन्नाथ रथ यात्रा में भाग लेने वाला जन्म-जन्म के चक्कर से मुक्त हो जाता है। भगवान जगन्नाथ को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना गया है।
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इनकी महिमा का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों एवं पुराणों में मिलता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ (भगवान श्रीकृष्ण) उनके भाई बलराम (बलभद्र) और बहन सुभद्रा रथयात्रा के मुख्य आराध्य होते हैं। जो इस रथयात्रा में शामिल होकर रथ को खींचते हैं, उन्हें सौ यज्ञ के बराबर पुण्य लाभ मिलता है। रथयात्रा के दौरान हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं एवं रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। जगन्नाथ यात्रा हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। यात्रा में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं।
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