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आईपीएच की जेई को हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत
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हमीरपुर। भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी आईपीएच विभाग की महिला जेई को प्रदेश उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिल गई है। विजिलेंस की टीम जेई को गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही थी लेकिन, इससे पहले की विजिलेंस उसे गिरफ्तार करती प्रदेश उच्च न्यायालय ने उसे जमानत दे दी। इसके साथ ही प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुरेश ठाकुर ने अतिरिक्त महा अधिवक्ता के माध्यम से 21 जून 2019 को मामले की स्टेटस रिपोर्ट प्रदेश उच्च न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं। सशर्त जमानत में कहा गया है कि आरोपी जेई को विजिलेंस की जांच में सहयोग करना होगा। जांच एजेंसी जब उचित समझे जेई से पूछताछ कर सकती है।
आरोपी जेई वर्तमान में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग शिमला स्थित प्रदेश मुख्यालय में सेवारत है। महिला जूनियर इंजीनियर की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश हमीरपुर की अदालत में खारिज हो चुकी है। जिसके बाद विजिलेंस उसे गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही थी। वर्ष 2014-15 में हमीरपुर जिले की भारी-भलेहड़ा पेयजल स्कीम में बिजली वायरिंग के कार्य के लिए 1.03 लाख रुपये में टेंडर और ओवर हेड टैंक लंबलू में वायरिंग के लिए 25 हजार रुपये का टेंडर आईपीएच विभाग ने आवंटित किया था। इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए डुगली पंचायत के प्रधान ओम प्रकाश ने विजिलेंस और आईपीएच विभाग में शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि इन दोनों पेयजल स्कीमों पर महज 42 से 45 हजार रुपये ही खर्च हुआ है। बिजली बोर्ड और आईपीएच के इंजीनियर ने भी जांच में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद जेई के खिलाफ विजिलेंस ने पीसी एक्ट में मामला दर्ज किया। उधर, डीएसपी विजिलेंस हमीरपुर बीडी भाटिया ने कहा कि आईपीएच विभाग की जेई की जमानत की अर्जी हमीरपुर न्यायालय से खारिज हो चुकी है। प्रदेश उच्च न्यायालय से जमानत मिलने की अभी तक अधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
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आरोपी जेई वर्तमान में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग शिमला स्थित प्रदेश मुख्यालय में सेवारत है। महिला जूनियर इंजीनियर की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश हमीरपुर की अदालत में खारिज हो चुकी है। जिसके बाद विजिलेंस उसे गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही थी। वर्ष 2014-15 में हमीरपुर जिले की भारी-भलेहड़ा पेयजल स्कीम में बिजली वायरिंग के कार्य के लिए 1.03 लाख रुपये में टेंडर और ओवर हेड टैंक लंबलू में वायरिंग के लिए 25 हजार रुपये का टेंडर आईपीएच विभाग ने आवंटित किया था। इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए डुगली पंचायत के प्रधान ओम प्रकाश ने विजिलेंस और आईपीएच विभाग में शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि इन दोनों पेयजल स्कीमों पर महज 42 से 45 हजार रुपये ही खर्च हुआ है। बिजली बोर्ड और आईपीएच के इंजीनियर ने भी जांच में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद जेई के खिलाफ विजिलेंस ने पीसी एक्ट में मामला दर्ज किया। उधर, डीएसपी विजिलेंस हमीरपुर बीडी भाटिया ने कहा कि आईपीएच विभाग की जेई की जमानत की अर्जी हमीरपुर न्यायालय से खारिज हो चुकी है। प्रदेश उच्च न्यायालय से जमानत मिलने की अभी तक अधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
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