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क्लीनिक संचालक के खिलाफ चालान पेश नहीं कर पाई पुलिस
Updated Sun, 08 Jul 2018 11:05 PM IST
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- फोटो : scan
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हमीरपुर। भ्रूण जांच के आरोप में अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालक के खिलाफ हमीरपुर पुलिस और जिला प्रशासन एक माह के भीतर न्यायालय में चालान पेश नहीं कर सके हैं। इन्होंने इस अवधि में चालान पेश करने का दावा किया है। इस मामले में पांच माह बीत जाने के बाद भी न्यायालय में चालान पेश नहीं हो पाया। बिलासपुर जिले के उपमंडल घुमारवीं के एक निजी अल्ट्रासाउंड क्लीनिक पर पुलिस विभाग हमीरपुर और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने 4 फरवरी 2018 को छापामारी की थी।
इस दौरान अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालक को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रंगे हाथ भ्रूण जांच करते हुए पकड़ा था। क्लीनिक के चिकित्सक ने गर्भवती महिला से इस जांच के लिए 18 हजार लिए थे। विभाग ने मामला दर्ज करते हुए इस निजी क्लीनिक को सील कर दिया था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक हमीरपुर रमन कुमार मीणा, तत्कालीन उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति, सीएमओ डॉ. सावित्री कटवाल, तत्कालीन महिला एवं बाल विकास अधिकारी वंदना चौहान, डीएसपी रेणु शर्मा और प्रोवेशन पुलिस सब इंस्पेक्टर रीता ने हमीरपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस मामले के पटाक्षेप करने की जानकारी दी थी और पुलिस और जिला प्रशासन ने एक माह के भीतर न्यायालय में चालान पेश करने का दावा किया था। लेकिन, इस मामले में पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक न्यायालय में चालान पेश नहीं हो पाया। बताया जा रहा है कि जिस निजी क्लीनिक पर यह कार्रवाई की गई थी, उस क्लीनिक के संचालक के सियासी तार जुडे़ हुए हैं। जिसकी मार्फत इस मामले को अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उधर, पुलिस अधीक्षक रमन कुमार मीणा का कहना है कि इस मामले में फोरेंसिक साइंस लैब में सैंपल भेजा गया था, जिसकी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई शीघ्र अमल में लाई जाएगी।
मेडिकल कॉलेज के कार्यक्रम में हमीरपुर देखा था आरोपी
डॉ. राधाकृष्ण राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिलान्यास के मौके पर हमीरपुर के रावमापा बाल स्कूल मैदान में एक जनसभा का आयोजन हुआ था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री समेत प्रदेश भाजपा सरकार के कई मंत्री और विधायक मौजूद थे। इस कार्यक्रम में घुमारवीं के निजी क्लीनिक संचालक को भी देखा गया था। कुछ देर के बाद आरोपी व्यक्ति कार्यक्रम से गायब हो गया था।
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इस दौरान अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालक को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रंगे हाथ भ्रूण जांच करते हुए पकड़ा था। क्लीनिक के चिकित्सक ने गर्भवती महिला से इस जांच के लिए 18 हजार लिए थे। विभाग ने मामला दर्ज करते हुए इस निजी क्लीनिक को सील कर दिया था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक हमीरपुर रमन कुमार मीणा, तत्कालीन उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति, सीएमओ डॉ. सावित्री कटवाल, तत्कालीन महिला एवं बाल विकास अधिकारी वंदना चौहान, डीएसपी रेणु शर्मा और प्रोवेशन पुलिस सब इंस्पेक्टर रीता ने हमीरपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस मामले के पटाक्षेप करने की जानकारी दी थी और पुलिस और जिला प्रशासन ने एक माह के भीतर न्यायालय में चालान पेश करने का दावा किया था। लेकिन, इस मामले में पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक न्यायालय में चालान पेश नहीं हो पाया। बताया जा रहा है कि जिस निजी क्लीनिक पर यह कार्रवाई की गई थी, उस क्लीनिक के संचालक के सियासी तार जुडे़ हुए हैं। जिसकी मार्फत इस मामले को अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उधर, पुलिस अधीक्षक रमन कुमार मीणा का कहना है कि इस मामले में फोरेंसिक साइंस लैब में सैंपल भेजा गया था, जिसकी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई शीघ्र अमल में लाई जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज के कार्यक्रम में हमीरपुर देखा था आरोपी
डॉ. राधाकृष्ण राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिलान्यास के मौके पर हमीरपुर के रावमापा बाल स्कूल मैदान में एक जनसभा का आयोजन हुआ था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री समेत प्रदेश भाजपा सरकार के कई मंत्री और विधायक मौजूद थे। इस कार्यक्रम में घुमारवीं के निजी क्लीनिक संचालक को भी देखा गया था। कुछ देर के बाद आरोपी व्यक्ति कार्यक्रम से गायब हो गया था।
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