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बिना लिखित अनुमति के विज्ञापन न करें प्रसारित : उपायुक्त
Updated Wed, 25 Oct 2017 06:36 PM IST
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हमीरपुर। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त संदीप कदम ने कहा है कि जिला में चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को प्रचार के लिए पोस्टर, पंपलेट, हैंडबिल, होर्डिंग्स, बैनर इत्यादि को इस्तेमाल करने से पहले जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127ए के तहत मीडिया प्रमाणीकरण एवं निगरानी समिति (एमसीएमसी) की अनुमति लेना अनिवार्य है। वहीं प्रचार सामग्री में प्रिंटर व प्रकाशक का नाम प्रतियों सहित छपा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियमों की अवहेलना होने पर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभिन्न उम्मीदवारों से संबंधित विज्ञापनों एवं पेड न्यूज पर निर्वाचन आयोग द्वारा गठित जिला स्तरीय मीडिया प्रमाणीकरण एवं निगरानी समिति लगातार नजर रख रही है। प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया में उम्मीदवारों द्वारा अपने-अपने पक्ष में प्रसारित किए जाने वाले विज्ञापनों के साथ-साथ पेड न्यूज का भी गहनता से विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कार्यरत केबल ऑपरेटर जिला स्तरीय मीडिया प्रमाणीकरण एवं निगरानी समिति की लिखित अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की राजनीतिक अपील या विज्ञापन इत्यादि को प्रसारित न करें। उन्होंने कहा कि पेड न्यूज से जुड़े किसी भी मामले को एमसीएमसी द्वारा संबंधित निर्वाचन अधिकारी को अगली कार्रवाई के लिए प्रेषित किया जाएगा। पेड न्यूज के संबंध में एमसीएमसी से सूचना मिलने पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी 96 घंटे की समयावधि में उम्मीदवार को नोटिस जारी करेंगे। नोटिस मिलने के 48 घंटे के भीतर संबंधित उम्मीदवार को नोटिस का जवाब देना होगा। यदि इस संबंध में उम्मीदवार नोटिस का जवाब नहीं देता है तो एमसीएमसी का निर्णय अंतिम माना जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय एमसीएमसी के निर्णय के खिलाफ राज्य स्तरीय एमसीएमसी में अपील की जा सकती है। उपायुक्त ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों द्वारा प्रचार पर विभिन्न माध्यमों के अंतर्गत विज्ञापनों इत्यादि पर होना वाला सारा खर्च उम्मीदवार के चुनावी व्यय में जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 28 लाख रुपये की चुनावी खर्चे की सीमा निर्धारित की है। जिसके भीतर ही उम्मीदवारों को चुनावी खर्चा करना होगा।
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