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किसानों के कलस्टर बनाकर जड़ी बूटियां उगाएगा आयुर्वेदिक विभाग
Updated Mon, 11 Jun 2018 10:41 PM IST
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जड़ी-बूटियां बदलेंगी किसानों की तकदीर
आयुर्वेदिक विभाग बनाएगा किसानों का कलस्टर
कम से कम दो हेक्टेयर भूमि की जाएगी चिन्हित
उमेश कुमार शर्मा
हमीरपुर। आयुर्वेदिक विभाग अब किसानों के कलस्टर बनाकर उनकी भूमि में जड़ी बूटियां और औषधीय पौधे उगाएगा। किसानों के एक कलस्टर में विभाग कम से कम दो हेक्टेयर भूमि चिन्हित करेगा। इस दो हेक्टेयर भूमि में आयुर्वेदिक विभाग की ओर से राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत औषधीय पौधे और जड़ी बूटियां उगाई जाएंगी। इन जड़ी बूटियों और औषधीय पौधों का प्रयोग विभाग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए करेगा। इसके साथ ही किसानों के लिए यह एक अच्छा रोजगार साबित होगा और उन्हें इससे अच्छी आमदन होगी। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुर्वेदिक विभाग ने इसकी प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इसके लिए विभाग की ओर से इंचार्ज बनाए गए हैं, जो कलस्टर में किसानों को जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। किसानों के समूह इसके लिए विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
प्रत्येक कलस्टर की दो हेक्टेयर भूमि की विभाग द्वारा विशेषज्ञों से जांच करवाई जाएगी। विशेषज्ञ जांच करने के बाद बताएंगे कि उक्त भूमि में कौन सो पौधा या जड़ी बूटी अधिक मात्रा में उग सकती है। इसके बाद जो जड़ी-बूटी जिस क्षेत्र में अधिक उगने योग्य होगी, उसकी खेती उसी क्षेत्र में की जाएगी। औषधीय पौधे और जड़ी बूटियों के पौधे और बीज खरीदने के लिए विभाग को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत बजट मिलेगा। खेती के बाद हर्बल गार्डन के विशेषज्ञ उगाई गई जड़ी बूटियों का समय-समय पर निरीक्षण एवं संरक्षण करेंगे। इससे आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए उचित मात्रा में औषधीय पौधे मिलेंगे और किसानों को भी आमदन होगी। इस संबंध में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी हमीरपुर डॉ. सरिता राणा का कहना है कि आयुर्वेदिक विभाग राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत किसानों के कलस्टर बनाएगा। इस एक कलस्टर में दो हेक्टेयर भूमि पर विशेषज्ञों की मदद से औषधीय पौधे और जड़ी बूटियां उगाई जाएंगी।
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आयुर्वेदिक विभाग बनाएगा किसानों का कलस्टर
कम से कम दो हेक्टेयर भूमि की जाएगी चिन्हित
उमेश कुमार शर्मा
हमीरपुर। आयुर्वेदिक विभाग अब किसानों के कलस्टर बनाकर उनकी भूमि में जड़ी बूटियां और औषधीय पौधे उगाएगा। किसानों के एक कलस्टर में विभाग कम से कम दो हेक्टेयर भूमि चिन्हित करेगा। इस दो हेक्टेयर भूमि में आयुर्वेदिक विभाग की ओर से राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत औषधीय पौधे और जड़ी बूटियां उगाई जाएंगी। इन जड़ी बूटियों और औषधीय पौधों का प्रयोग विभाग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए करेगा। इसके साथ ही किसानों के लिए यह एक अच्छा रोजगार साबित होगा और उन्हें इससे अच्छी आमदन होगी। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुर्वेदिक विभाग ने इसकी प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इसके लिए विभाग की ओर से इंचार्ज बनाए गए हैं, जो कलस्टर में किसानों को जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। किसानों के समूह इसके लिए विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
प्रत्येक कलस्टर की दो हेक्टेयर भूमि की विभाग द्वारा विशेषज्ञों से जांच करवाई जाएगी। विशेषज्ञ जांच करने के बाद बताएंगे कि उक्त भूमि में कौन सो पौधा या जड़ी बूटी अधिक मात्रा में उग सकती है। इसके बाद जो जड़ी-बूटी जिस क्षेत्र में अधिक उगने योग्य होगी, उसकी खेती उसी क्षेत्र में की जाएगी। औषधीय पौधे और जड़ी बूटियों के पौधे और बीज खरीदने के लिए विभाग को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत बजट मिलेगा। खेती के बाद हर्बल गार्डन के विशेषज्ञ उगाई गई जड़ी बूटियों का समय-समय पर निरीक्षण एवं संरक्षण करेंगे। इससे आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए उचित मात्रा में औषधीय पौधे मिलेंगे और किसानों को भी आमदन होगी। इस संबंध में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी हमीरपुर डॉ. सरिता राणा का कहना है कि आयुर्वेदिक विभाग राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत किसानों के कलस्टर बनाएगा। इस एक कलस्टर में दो हेक्टेयर भूमि पर विशेषज्ञों की मदद से औषधीय पौधे और जड़ी बूटियां उगाई जाएंगी।
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