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गरीब परिवार की मदद को डा. सोनाली ने बढ़ाए हाथ
Updated Sun, 26 Aug 2018 10:23 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नादौन (हमीरपुर)। चेन्नई में रहने वाली डा. सोनाली शर्मा ने नादौन की सपड़ोह पंचायत के लाहड़ गांव निवासी एक पीड़ित दलित परिवार की मदद को हाथ बढ़ाए हैं। डा. सोनाली ने रविवार को परिवार के साथ रक्षा बंधन का त्योहार मनाया। बिना दरवाजे के एक कच्चे कमरे में रह रहे इस परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। डा. सोनाली ने इस परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।
‘अमर उजाला’ ने अपने 23 अगस्त के अंक में पारिवारिक स्थिति को दर्शाते हुए पति कोमा में, दो साल की बेटी को पीठ पर उठाकर दिहाड़ी लगा रही.. रंजना शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। समाचार पढ़ने के बाद डा. सोनाली विशेष तौर पर लाहड़ गईं। लाहड़ गांव निवासी 22 वर्षीय रंजना गत दो वर्षों से कोमा में चल रहे अपने पति पंकज की सेवा कर रही हैं। पंकज दो वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। उसकी दो वर्ष की एक बच्ची है। इतना ही नहीं गत दिनों वह आंगनबाड़ी में सहायिका के पद से इसलिए वंचित रह गई क्योंकि उसका आय प्रमाण पत्र बीपीएल परिवार में होने के बावजूद गलत बना दिया गया था। रंजना का कहना है कि पति के इलाज पर खर्च हुए करीब एक लाख रुपये में से केवल उसे बीस हजार रुपये ही अभी तक मिले हैं। इन्हीं सब बातों से प्रभावित होकर डा. सोनाली नादौन पहुंची हैं। उन्होंने परिवार को उपहार दिए और आर्थिक तौर पर भी मदद की है। डा. सोनाली सोलन की रहने वाली हैं। जबकि उनकी माता प्रेम कुमारी नादौन में नौकरी करती हैं। सोनाली के पिता भी डॉक्टर हैं। डा. सोनाली ने भी सरकार से मांग की है कि इस परिवार के साथ न्याय किया जाए।
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‘अमर उजाला’ ने अपने 23 अगस्त के अंक में पारिवारिक स्थिति को दर्शाते हुए पति कोमा में, दो साल की बेटी को पीठ पर उठाकर दिहाड़ी लगा रही.. रंजना शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। समाचार पढ़ने के बाद डा. सोनाली विशेष तौर पर लाहड़ गईं। लाहड़ गांव निवासी 22 वर्षीय रंजना गत दो वर्षों से कोमा में चल रहे अपने पति पंकज की सेवा कर रही हैं। पंकज दो वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। उसकी दो वर्ष की एक बच्ची है। इतना ही नहीं गत दिनों वह आंगनबाड़ी में सहायिका के पद से इसलिए वंचित रह गई क्योंकि उसका आय प्रमाण पत्र बीपीएल परिवार में होने के बावजूद गलत बना दिया गया था। रंजना का कहना है कि पति के इलाज पर खर्च हुए करीब एक लाख रुपये में से केवल उसे बीस हजार रुपये ही अभी तक मिले हैं। इन्हीं सब बातों से प्रभावित होकर डा. सोनाली नादौन पहुंची हैं। उन्होंने परिवार को उपहार दिए और आर्थिक तौर पर भी मदद की है। डा. सोनाली सोलन की रहने वाली हैं। जबकि उनकी माता प्रेम कुमारी नादौन में नौकरी करती हैं। सोनाली के पिता भी डॉक्टर हैं। डा. सोनाली ने भी सरकार से मांग की है कि इस परिवार के साथ न्याय किया जाए।
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