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35 लाख की गाड़ी खरीदने पर भड़का पेंशनर्स कर्मचारी संघ
Updated Sat, 28 Apr 2018 11:13 PM IST
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड पेंशनर्स कर्मचारी संघ ने बोर्ड में 35 लाख रुपये की लग्जरी गाड़ी लेने और वीआईपी नंबर पर लाखों रुपये खर्च करने का कड़ा विरोध किया है। संघ ने बोर्ड परिसर के सौंदर्यीकरण पर खर्चे करोड़ों रुपये पर भी सवाल उठाए हैं। संघ के जोनल प्रधान एवं बोर्ड से सेवानिवृत्त सहायक सचिव अशोक शर्मा ने कहा धर्मशाला को केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया है। जिसके चलते शहर के सौंदर्यीकरण पर केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। ऐसे में बोर्ड के खजाने से करोड़ों रुपये परिसर के सौंदर्यीकरण पर खर्च करने का औचित्य नहीं बनता।
जोनल प्रधान ने सवाल उठाया है कि किसकी अनुमति से बोर्ड ने करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची कर डाली। उन्होंने कहा कि सालों पहले जब शिमला से धर्मशाला में शिक्षा बोर्ड को शिफ्ट किया गया था, उस समय पांच से छह जगहों पर कार्य किया जाता था। पुराने कर्मचारियों व अधिकारियों की कड़ी मेहनत के दम पर आज बोर्ड के भव्य भवन बने हुए हैं। आज बोर्ड के अधिकारियों के खर्चीले रवैये से पेंशनर्स संघ बहुत दुखी है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से इस सारे मामले की जांच की मांग की है। जोनल प्रधान ने यह भी कहा कि बोर्ड से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को आज तक चिकित्सा भत्ता की सुविधा लागू नहीं हो पाई है। पूर्व की बोर्ड मीटिंग में इस पर फैसला हो चुका है। बोर्ड मीटिंग में वित्त विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। अब जानबूझ कर वित्त विभाग से अनुमति लेने का बहाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष और प्रदेश सरकार से चिकित्सा भत्ता सुविधा को शीघ्र बहाल करने की मांग उठाई है।
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जोनल प्रधान ने सवाल उठाया है कि किसकी अनुमति से बोर्ड ने करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची कर डाली। उन्होंने कहा कि सालों पहले जब शिमला से धर्मशाला में शिक्षा बोर्ड को शिफ्ट किया गया था, उस समय पांच से छह जगहों पर कार्य किया जाता था। पुराने कर्मचारियों व अधिकारियों की कड़ी मेहनत के दम पर आज बोर्ड के भव्य भवन बने हुए हैं। आज बोर्ड के अधिकारियों के खर्चीले रवैये से पेंशनर्स संघ बहुत दुखी है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से इस सारे मामले की जांच की मांग की है। जोनल प्रधान ने यह भी कहा कि बोर्ड से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को आज तक चिकित्सा भत्ता की सुविधा लागू नहीं हो पाई है। पूर्व की बोर्ड मीटिंग में इस पर फैसला हो चुका है। बोर्ड मीटिंग में वित्त विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। अब जानबूझ कर वित्त विभाग से अनुमति लेने का बहाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष और प्रदेश सरकार से चिकित्सा भत्ता सुविधा को शीघ्र बहाल करने की मांग उठाई है।
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