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आलू बीज पर भी आई महंगाई
अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 12 Nov 2013 01:16 PM IST
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आलू की फसल पर साल भर की रोजी रोटी कमाने वाले किसानों पर महंगाई की मार पड़ी है।
आलू का बीज महंगा हो गया है। इस बार अभी तक आलू का बीज करीब तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है।
एक तो आलू का बीज पहले से ही मंहगा और ऊपर से खाद की बोरी 1100 रुपये की मिल रही है। इससे किसान चिंतित हो गए हैं।
कांगड़ा में आलू की फसल पर 25 से तीस प्रतिशत किसान निर्भर हैं।
पालमपुर, बैजनाथ, नगरोटा बगवां तथा कांगड़ा के इलाकों में करीब 300 हेक्टेयर भूमि पर आलू लगाया जाता है।
हालांकि, सरकार ने इसका रेट करीब 2600 क्विंटल तय किया है, लेकिन किराया भाड़ा मिला कर इसका रेट किसानों तक 2800 रुपये से तीन हजार तक पहुंच रहा है।
आलू बीज का मंहगा होने का सबसे बड़ा कारण है कि लाहौल स्पीति में गुजरात तथा पश्चिमी बंगाल के व्यापारी आलू लेने सीधे आ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि सरकार आलू के बीज पर 30 से 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए।
उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. बीके सोनी ने कहा कि लाहौल स्पीति में बाहरी राज्यों के व्यापारी आने से तथा खाने का आलू मंहगा होने से बीज महंगा है।
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आलू का बीज महंगा हो गया है। इस बार अभी तक आलू का बीज करीब तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है।
एक तो आलू का बीज पहले से ही मंहगा और ऊपर से खाद की बोरी 1100 रुपये की मिल रही है। इससे किसान चिंतित हो गए हैं।
कांगड़ा में आलू की फसल पर 25 से तीस प्रतिशत किसान निर्भर हैं।
पालमपुर, बैजनाथ, नगरोटा बगवां तथा कांगड़ा के इलाकों में करीब 300 हेक्टेयर भूमि पर आलू लगाया जाता है।
हालांकि, सरकार ने इसका रेट करीब 2600 क्विंटल तय किया है, लेकिन किराया भाड़ा मिला कर इसका रेट किसानों तक 2800 रुपये से तीन हजार तक पहुंच रहा है।
आलू बीज का मंहगा होने का सबसे बड़ा कारण है कि लाहौल स्पीति में गुजरात तथा पश्चिमी बंगाल के व्यापारी आलू लेने सीधे आ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि सरकार आलू के बीज पर 30 से 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए।
उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. बीके सोनी ने कहा कि लाहौल स्पीति में बाहरी राज्यों के व्यापारी आने से तथा खाने का आलू मंहगा होने से बीज महंगा है।