{"_id":"6abd3e7bd9591777a20a9708","slug":"vehicle-ran-33000-km-after-repairs-commission-rejected-the-claim-of-a-defect-chamba-news-c-88-1-ssml1004-198347-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: मरम्मत के बाद 33 हजार किमी दौड़ा वाहन, आयोग ने खारिज कर दिया खराबी का दावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: मरम्मत के बाद 33 हजार किमी दौड़ा वाहन, आयोग ने खारिज कर दिया खराबी का दावा
Wed, 30 Sep 2026 10:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 30 Sep 2026 10:23 PM IST
विज्ञापन
घटिया मरम्मत का ठोस साक्ष्य नहीं मिला, नियमित सर्विसिंग का रिकॉर्ड भी नहीं कर सका पेश
स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट निर्णायक नहीं मानी, वैज्ञानिक जांच में किसी पुर्जे की खराबी प्रमाणित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मरम्मत के बाद वाहन करीब 33 हजार किलोमीटर चलने के बावजूद बार-बार खराबी और घटिया मरम्मत का दावा करना शिकायतकर्ता को भारी पड़ गया।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा ने मारुति सुजुकी वाहन में सेवा में कमी और घटिया कारीगरी के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर शिकायत खारिज कर दी। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार वाहन मई 2023 में मरम्मत के बाद लेने के बाद सितंबर 2024 तक 33,747 किलोमीटर चला।
बरौर निवासी हरीश सिंह ने 25 जनवरी 2019 को मारुति सुजुकी एरेना पठानकोट व्हीकल्स से माल ढुलाई के लिए वाहन खरीदा था। सितंबर 2022 में वाहन से असामान्य भूरा धुआं निकलने और पहले-दूसरे गियर में इंजन की शक्ति कम होने की शिकायत सामने आई। कार्यशाला ने टर्बोचार्जर बदलने की सलाह दी और 17 नवंबर को इसके लिए 18,286 रुपये का बिल बनाया।
शिकायतकर्ता के अनुसार मरम्मत के दो दिन बाद वाहन फिर खराब हो गया। 17 दिसंबर 2022 को इंजन की मरम्मत और अन्य पुर्जों के लिए 18,110 और 19,052 रुपये के बिल दिए गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वास्तविक खराबी छिपाकर घटिया मरम्मत की गई।
विज्ञापन
विपक्षी पक्ष ने आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि वाहन की नियमित सर्विसिंग में अंतर रहा और भारी व्यावसायिक इस्तेमाल से इंजन पर दबाव पड़ा। विपक्षी ने यह भी कहा कि इंजन ब्लॉक बदलने की सलाह दी गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने सिलेंडर स्लीव लगवाने पर जोर दिया।
आयोग ने कहा कि स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट में घटिया कारीगरी की संभावना जताई गई थी, लेकिन इंजन का वैज्ञानिक निदान नहीं किया गया था। किसी विशिष्ट पुर्जे की खराबी भी प्रमाणित नहीं हुई। शिकायतकर्ता नियमित सर्विसिंग का पर्याप्त रिकॉर्ड भी पेश नहीं कर सका। आयोग ने मरम्मत के बाद वाहन के 33,747 किलोमीटर चलने के तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना। इन परिस्थितियों में सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार साबित नहीं होने पर अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर की पीठ ने शिकायत खारिज कर दी।
--
विज्ञापन
स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट निर्णायक नहीं मानी, वैज्ञानिक जांच में किसी पुर्जे की खराबी प्रमाणित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मरम्मत के बाद वाहन करीब 33 हजार किलोमीटर चलने के बावजूद बार-बार खराबी और घटिया मरम्मत का दावा करना शिकायतकर्ता को भारी पड़ गया।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा ने मारुति सुजुकी वाहन में सेवा में कमी और घटिया कारीगरी के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर शिकायत खारिज कर दी। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार वाहन मई 2023 में मरम्मत के बाद लेने के बाद सितंबर 2024 तक 33,747 किलोमीटर चला।
बरौर निवासी हरीश सिंह ने 25 जनवरी 2019 को मारुति सुजुकी एरेना पठानकोट व्हीकल्स से माल ढुलाई के लिए वाहन खरीदा था। सितंबर 2022 में वाहन से असामान्य भूरा धुआं निकलने और पहले-दूसरे गियर में इंजन की शक्ति कम होने की शिकायत सामने आई। कार्यशाला ने टर्बोचार्जर बदलने की सलाह दी और 17 नवंबर को इसके लिए 18,286 रुपये का बिल बनाया।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता के अनुसार मरम्मत के दो दिन बाद वाहन फिर खराब हो गया। 17 दिसंबर 2022 को इंजन की मरम्मत और अन्य पुर्जों के लिए 18,110 और 19,052 रुपये के बिल दिए गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वास्तविक खराबी छिपाकर घटिया मरम्मत की गई।
विज्ञापन
विपक्षी पक्ष ने आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि वाहन की नियमित सर्विसिंग में अंतर रहा और भारी व्यावसायिक इस्तेमाल से इंजन पर दबाव पड़ा। विपक्षी ने यह भी कहा कि इंजन ब्लॉक बदलने की सलाह दी गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने सिलेंडर स्लीव लगवाने पर जोर दिया।
आयोग ने कहा कि स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट में घटिया कारीगरी की संभावना जताई गई थी, लेकिन इंजन का वैज्ञानिक निदान नहीं किया गया था। किसी विशिष्ट पुर्जे की खराबी भी प्रमाणित नहीं हुई। शिकायतकर्ता नियमित सर्विसिंग का पर्याप्त रिकॉर्ड भी पेश नहीं कर सका। आयोग ने मरम्मत के बाद वाहन के 33,747 किलोमीटर चलने के तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना। इन परिस्थितियों में सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार साबित नहीं होने पर अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर की पीठ ने शिकायत खारिज कर दी।