{"_id":"6abd3fd13912dcc5510c6604","slug":"using-leeches-to-treat-skin-diseases-chamba-news-c-88-1-ssml1006-198394-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: त्वचा रोगों के इलाज में जौंक का दांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: त्वचा रोगों के इलाज में जौंक का दांव
Wed, 30 Sep 2026 10:30 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 30 Sep 2026 10:30 PM IST
विज्ञापन
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में लीच थैरेपी का लाभ उठाते मरीज। संवाद।
बालू अस्पताल में बढ़ी लीच थैरेपी की मांग, दाद-सोरायसिस समेत कई त्वचा रोगों में हो रहा इस्तेमाल
पुरानी चिकित्सा पद्धति से आधुनिक दौर में उपचार की कोशिश, एक मरीज पर एक जौंक का इस्तेमाल
प्रवीण कुमार
चंबा। त्वचा रोगों के उपचार के लिए जिला आयुर्वेदिक अस्पताल बालू में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की एक पुरानी विधि का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अस्पताल में लीच थैरेपी यानी जौंक चिकित्सा के माध्यम से त्वचा संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इस पद्धति का इस्तेमाल दाद, सोरायसिस, कील-मुहांसों समेत अन्य त्वचा रोगों में किया जा रहा है। उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
लीच थैरेपी में चिकित्सकीय निगरानी में निर्विष जौंक का इस्तेमाल किया जाता है। जिस हिस्से में उपचार किया जाना होता है, वहां शहद या घी लगाकर जौंक को त्वचा पर चिपकाया जाता है। जौंक कुछ समय तक त्वचा से चिपकी रहकर रक्त चूसती है। करीब तीन मिनट बाद उसे हटा दिया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में इस प्रक्रिया का इस्तेमाल प्रभावित हिस्से से रक्तस्राव करवाने और उपचार प्रक्रिया में सहायता के लिए किया जाता है।
--
एक मरीज पर एक ही जौंक
संक्रमण के खतरे को कम रखने के लिए एक जौंक का इस्तेमाल केवल एक मरीज पर किया जाता है। थैरेपी के बाद उस जौंक को दोबारा किसी अन्य मरीज पर इस्तेमाल नहीं किया जाता। अस्पताल में सामान्य तौर पर मरीज को दस सत्रों में थैरेपी दी जाती है। यह प्रक्रिया दिन में एक बार चिकित्सकीय देखरेख में की जाती है।
विज्ञापन
--
विभाग के फार्म में तैयार होती हैं जौंक
थैरेपी में इस्तेमाल होने वाली निर्विष जौंक विभाग के फार्म में तैयार की जाती हैं। विभाग के अनुसार जौंक की विभिन्न प्रजातियों में से उपचार के लिए निर्विष जौंक का ही चयन किया जाता है। अस्पताल में उपलब्ध व्यवस्था के तहत मरीज से इस थैरेपी के लिए 200 रुपये शुल्क लिया जाता है।
--
आयुष चिकित्सा की ओर बढ़ रहा रुझान
जिला आयुष अधिकारी डॉ. अनीता शर्मा ने बताया कि लीच थैरेपी का लाभ लेने के लिए अस्पताल में त्वचा रोगियों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मरीजों को उपचार से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। लोगों का आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति रुझान भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि थैरेपी चिकित्सकीय निगरानी में ही दी जाती है।
विज्ञापन
पुरानी चिकित्सा पद्धति से आधुनिक दौर में उपचार की कोशिश, एक मरीज पर एक जौंक का इस्तेमाल
प्रवीण कुमार
चंबा। त्वचा रोगों के उपचार के लिए जिला आयुर्वेदिक अस्पताल बालू में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की एक पुरानी विधि का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अस्पताल में लीच थैरेपी यानी जौंक चिकित्सा के माध्यम से त्वचा संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इस पद्धति का इस्तेमाल दाद, सोरायसिस, कील-मुहांसों समेत अन्य त्वचा रोगों में किया जा रहा है। उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
लीच थैरेपी में चिकित्सकीय निगरानी में निर्विष जौंक का इस्तेमाल किया जाता है। जिस हिस्से में उपचार किया जाना होता है, वहां शहद या घी लगाकर जौंक को त्वचा पर चिपकाया जाता है। जौंक कुछ समय तक त्वचा से चिपकी रहकर रक्त चूसती है। करीब तीन मिनट बाद उसे हटा दिया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में इस प्रक्रिया का इस्तेमाल प्रभावित हिस्से से रक्तस्राव करवाने और उपचार प्रक्रिया में सहायता के लिए किया जाता है।
विज्ञापन
एक मरीज पर एक ही जौंक
संक्रमण के खतरे को कम रखने के लिए एक जौंक का इस्तेमाल केवल एक मरीज पर किया जाता है। थैरेपी के बाद उस जौंक को दोबारा किसी अन्य मरीज पर इस्तेमाल नहीं किया जाता। अस्पताल में सामान्य तौर पर मरीज को दस सत्रों में थैरेपी दी जाती है। यह प्रक्रिया दिन में एक बार चिकित्सकीय देखरेख में की जाती है।
विज्ञापन
विभाग के फार्म में तैयार होती हैं जौंक
थैरेपी में इस्तेमाल होने वाली निर्विष जौंक विभाग के फार्म में तैयार की जाती हैं। विभाग के अनुसार जौंक की विभिन्न प्रजातियों में से उपचार के लिए निर्विष जौंक का ही चयन किया जाता है। अस्पताल में उपलब्ध व्यवस्था के तहत मरीज से इस थैरेपी के लिए 200 रुपये शुल्क लिया जाता है।
आयुष चिकित्सा की ओर बढ़ रहा रुझान
जिला आयुष अधिकारी डॉ. अनीता शर्मा ने बताया कि लीच थैरेपी का लाभ लेने के लिए अस्पताल में त्वचा रोगियों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मरीजों को उपचार से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। लोगों का आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति रुझान भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि थैरेपी चिकित्सकीय निगरानी में ही दी जाती है।

जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में लीच थैरेपी का लाभ उठाते मरीज। संवाद।