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ढकोग-तुंदाह सड़क हादसे में बुझ गए चार घरों के चिराग
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चंबा। ढकोग-तुंदाह सड़क पर तरेला के समीप हुए दर्दनाक हादसे में चार घरों के चिराग बुझ गए। करीब छह सौ मीटर गहरी खाई में गिरी गाड़ी से घायलों को सड़क तक पहुंचाने में लोगों को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
मगर लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए छह मीटर की खड़ी चढ़ाई पर पीठ पर उठाकर दो घायलों को सड़क तक पहुंचाया। हालांकि इसमें एक युवक ने रास्ते में दम तोड़ दिया। मौके पर मंजर ऐसा था कि उसे देखकर उन सभी की आंखें नम हो गई।
जानकारी के अनुसार सेेब पैकिंग का काम करने वाले रमेश, राजेंद्र और संजीव समेत एक अन्य सहयोगी सुरेंद्र के साथ एक सप्ताह पहले तुंदाह गए थे। रविवार को चारों घर लौट रहे थे। घर में रमेश का 12 वर्षीय लड़का और राजेंद्र की एक साल की बेटी पिता के घर आने के इंतजार कर रही थी। मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था। रमेश कुमार और संजीव कुमार अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार के पालन पोषण की जिम्मेवारी उनके कंधों पर थी।
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सुरिंद्र के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैैं। अकसर सेब सीजन के दौरान पैकिंग का काम करने वाले चारों घर से बाहर जाते रहते थे और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। हादसे का शिकार हुए संजीव परिवार में सबसे छोटे थे। संजीव के दो बड़े भाई है। जानकारी के अनुसार तरेला नाला के समीप कैंपर गाड़ी छह सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी। दर्दनाक हादसे में रमेश, राजेंद्र और संजीव कुमार की मौके पर ही मौत हो गई।
जबकि घायल सुरेंद्र कुमार ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से हादसे के दो घायलों को पीठ पर उठाकर सड़क तक पहुंचाया। जबकि मृतकों के शवों को छह सौ मीटर गहरी खाई से सड़क तक पहुंचाने के लिए पुलिस और लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। लोगों का कहना है कि अगर सड़क पर क्रैश बैरियर होते तो शायद इस हादसे को टला जा सकता था।
हादसा इतना भयावह था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। हादसे से सिढ़कुंड पंचायत के ग्रामीणों की हर आंख नम हो गई है। हादसे के मृतकों के परिजनों केे दस-दस हजार रुपये और घायल को पांच हजार रुपये फौरी राहत दी गई। हादसे के एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भरमौर ले जाया गया है।
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मगर लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए छह मीटर की खड़ी चढ़ाई पर पीठ पर उठाकर दो घायलों को सड़क तक पहुंचाया। हालांकि इसमें एक युवक ने रास्ते में दम तोड़ दिया। मौके पर मंजर ऐसा था कि उसे देखकर उन सभी की आंखें नम हो गई।
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जानकारी के अनुसार सेेब पैकिंग का काम करने वाले रमेश, राजेंद्र और संजीव समेत एक अन्य सहयोगी सुरेंद्र के साथ एक सप्ताह पहले तुंदाह गए थे। रविवार को चारों घर लौट रहे थे। घर में रमेश का 12 वर्षीय लड़का और राजेंद्र की एक साल की बेटी पिता के घर आने के इंतजार कर रही थी। मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था। रमेश कुमार और संजीव कुमार अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार के पालन पोषण की जिम्मेवारी उनके कंधों पर थी।
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सुरिंद्र के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैैं। अकसर सेब सीजन के दौरान पैकिंग का काम करने वाले चारों घर से बाहर जाते रहते थे और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। हादसे का शिकार हुए संजीव परिवार में सबसे छोटे थे। संजीव के दो बड़े भाई है। जानकारी के अनुसार तरेला नाला के समीप कैंपर गाड़ी छह सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी। दर्दनाक हादसे में रमेश, राजेंद्र और संजीव कुमार की मौके पर ही मौत हो गई।
जबकि घायल सुरेंद्र कुमार ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से हादसे के दो घायलों को पीठ पर उठाकर सड़क तक पहुंचाया। जबकि मृतकों के शवों को छह सौ मीटर गहरी खाई से सड़क तक पहुंचाने के लिए पुलिस और लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। लोगों का कहना है कि अगर सड़क पर क्रैश बैरियर होते तो शायद इस हादसे को टला जा सकता था।
हादसा इतना भयावह था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। हादसे से सिढ़कुंड पंचायत के ग्रामीणों की हर आंख नम हो गई है। हादसे के मृतकों के परिजनों केे दस-दस हजार रुपये और घायल को पांच हजार रुपये फौरी राहत दी गई। हादसे के एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भरमौर ले जाया गया है।