{"_id":"64ac4b3ad5a5ce567b039018","slug":"thyroid-tests-are-not-being-done-in-the-medical-college-lab-chamba-news-c-88-1-ssml1006-2789-2023-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: मेडिकल कॉलेज की लैब में नहीं हो रहे थायराइड के टेस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: मेडिकल कॉलेज की लैब में नहीं हो रहे थायराइड के टेस्ट
विज्ञापन
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में मरीजों के थायराइड टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। प्रयोगशाला में टेस्ट करने में इस्तेमाल की जाने वाली किट खत्म हो चुकी हैं। इसकी वजह से मरीजों को निजी लैब में जाकर टेस्ट करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यहां पर मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए 500 से 700 रुपये चुकाने पड़े रहे हैं जबकि सरकारी प्रयोगशाला में सामान्य मरीजों से टेस्ट का केवल 200 रुपये शुल्क लिया जाता है। वहीं बीपीएल मरीजों से टेस्ट के बदले में कोई पैसा नहीं लिया जाता है।
निजी लैबों में बीपीएल मरीजों को भी टेस्ट करवाने के लिए मोटे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 500 से 600 मरीजों की ओपीडी रहती है। इस दौरान विभिन्न ओपीडी में 40 से 50 मरीजों को थायराइड के टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। मरीज टेस्ट करवाने के लिए सरकारी प्रयोगशाला में जाते हैं लेकिन एक सप्ताह से मरीजों के प्रयोगशाला में टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। सोमवार को जहां थायराइड के टेस्ट करवाने वाले मरीजों की निजी लैबों के बाहर कतारें लगी थीं तो वहीं मेडिकल कॉलेज की लैब सूनी पड़ी थी। सरकारी लैब में किट उपलब्ध करवाने के लिए स्टाफ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को सूचित कर चुका है लेकिन प्रबंधन की ओर से अभी तक इस दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी प्रयोगशाला के अलावा मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए सस्ते दर पर टेस्ट करने के लिए क्रस्ना फार्मेसी की लैब भी खोली गई है लेकिन इसमें भी मरीजों के टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। इसके चलते मरीजों को निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। चिकित्सा उप अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि लैब में थायराइड के टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली किट जल्द ही उपलब्ध करवाई जाएंगी।
विज्ञापन
निजी लैबों में बीपीएल मरीजों को भी टेस्ट करवाने के लिए मोटे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 500 से 600 मरीजों की ओपीडी रहती है। इस दौरान विभिन्न ओपीडी में 40 से 50 मरीजों को थायराइड के टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। मरीज टेस्ट करवाने के लिए सरकारी प्रयोगशाला में जाते हैं लेकिन एक सप्ताह से मरीजों के प्रयोगशाला में टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। सोमवार को जहां थायराइड के टेस्ट करवाने वाले मरीजों की निजी लैबों के बाहर कतारें लगी थीं तो वहीं मेडिकल कॉलेज की लैब सूनी पड़ी थी। सरकारी लैब में किट उपलब्ध करवाने के लिए स्टाफ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को सूचित कर चुका है लेकिन प्रबंधन की ओर से अभी तक इस दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी प्रयोगशाला के अलावा मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए सस्ते दर पर टेस्ट करने के लिए क्रस्ना फार्मेसी की लैब भी खोली गई है लेकिन इसमें भी मरीजों के टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। इसके चलते मरीजों को निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। चिकित्सा उप अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि लैब में थायराइड के टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली किट जल्द ही उपलब्ध करवाई जाएंगी।
विज्ञापन