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Chamba News: बचपन के बस्ते पर रावी का पहरा
Sat, 19 Sep 2026 10:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 19 Sep 2026 10:38 PM IST
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पुल के इंतजार में शाहलूंई के नौनिहाल रोज नदी के तेज बहाव में उतरकर पहुंच रहे स्कूल
अभिभावकों का हाथ पकड़ पानी पार करते हैं बच्चे, अचानक जलस्तर बढ़ने पर रहता है हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। एक तरफ कंधे पर बस्ता, दूसरी तरफ अभिभावक का हाथ और सामने उफनती रावी। शाहलूंई गांव के बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचने का रास्ता कुछ ऐसा ही है।
पढ़ने की चाह उन्हें रोज उस नदी के बीच उतार रही है, जिसके बहाव का भरोसा नहीं। पुल की सुविधा न होने के कारण नौनिहाल पानी में उतरकर रावी पार करते हैं और इसी जोखिम भरे रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं।
बकाणी पंचायत के शाहलूंई समेत तीन गांवों की करीब 500 आबादी आज भी रावी के आर-पार आवागमन पर निर्भर है। गांव तक पक्की सड़क और नदी पर पुल की सुविधा नहीं होने से बरसात में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए भी चिंता का कारण बन जाता है।
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कई बार छोटे बच्चों को परिजन हाथ पकड़कर पानी के बीच से निकालते हैं। तेज बहाव में जरा सी चूक भारी पड़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए रोजाना यह जोखिम उठाना उनकी मजबूरी बन गया है।
ग्रामीण कैलाश कुमार, अमर सिंह, ढीलो राम, दीवान चंद, महिंद्र सिंह, मदन लाल, दीपक कुमार और उमेश कुमार ने बताया कि उन्हें झूला पुल बनने की उम्मीद जगी थी। पूर्व विधायक जिया लाल ने इसके निर्माण के लिए शिलान्यास भी किया था, लेकिन इसके बाद पुल का निर्माण धरातल पर नहीं उतर पाया। ग्रामीणों के अनुसार, शिलान्यास के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से जल्द पुल और सड़क सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है, ताकि बच्चों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर रावी पार न करनी पड़े।
उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राकेश मरौल ने कहा कि उच्चाधिकारियों को इस बारे में अवगत करवा दिया गया है। समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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अभिभावकों का हाथ पकड़ पानी पार करते हैं बच्चे, अचानक जलस्तर बढ़ने पर रहता है हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। एक तरफ कंधे पर बस्ता, दूसरी तरफ अभिभावक का हाथ और सामने उफनती रावी। शाहलूंई गांव के बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचने का रास्ता कुछ ऐसा ही है।
पढ़ने की चाह उन्हें रोज उस नदी के बीच उतार रही है, जिसके बहाव का भरोसा नहीं। पुल की सुविधा न होने के कारण नौनिहाल पानी में उतरकर रावी पार करते हैं और इसी जोखिम भरे रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं।
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बकाणी पंचायत के शाहलूंई समेत तीन गांवों की करीब 500 आबादी आज भी रावी के आर-पार आवागमन पर निर्भर है। गांव तक पक्की सड़क और नदी पर पुल की सुविधा नहीं होने से बरसात में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए भी चिंता का कारण बन जाता है।
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कई बार छोटे बच्चों को परिजन हाथ पकड़कर पानी के बीच से निकालते हैं। तेज बहाव में जरा सी चूक भारी पड़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए रोजाना यह जोखिम उठाना उनकी मजबूरी बन गया है।
ग्रामीण कैलाश कुमार, अमर सिंह, ढीलो राम, दीवान चंद, महिंद्र सिंह, मदन लाल, दीपक कुमार और उमेश कुमार ने बताया कि उन्हें झूला पुल बनने की उम्मीद जगी थी। पूर्व विधायक जिया लाल ने इसके निर्माण के लिए शिलान्यास भी किया था, लेकिन इसके बाद पुल का निर्माण धरातल पर नहीं उतर पाया। ग्रामीणों के अनुसार, शिलान्यास के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से जल्द पुल और सड़क सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है, ताकि बच्चों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर रावी पार न करनी पड़े।
उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राकेश मरौल ने कहा कि उच्चाधिकारियों को इस बारे में अवगत करवा दिया गया है। समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।