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Chamba News: मंडी से पहले ही मटर की कमाई खा रहा पांच किमी का सफर

Wed, 07 Oct 2026 10:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Wed, 07 Oct 2026 10:46 PM IST
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The five-kilometer journey to the mandi is already eating into the earnings from the peas.
भड़ेला के दर्जनभर गांवों में खेत से सड़क तक खच्चरों की पीठ पर ढोनी पड़ रही फसल, एक तरफ 100 रुपये खर्च
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सड़क गांव तक पहुंचती तो बचती किसानों की मेहनत और ढुलाई की रकम, वर्षों से सड़क का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी (चंबा)। मटर की फलियां खेतों में तैयार हैं और किसान अच्छी पैदावार से कमाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन बाजार तक पहुंचने से पहले ही उनकी कमाई का हिस्सा रास्ते में खर्च हो रहा है।
भड़ेला पंचायत के हांगोई, जटयास, दियोड़ी, त्रिरणार्थी, चढ़ समेत करीब एक दर्जन गांवों में सड़क नहीं होने के कारण किसानों को खेत से करीब पांच किलोमीटर दूर सड़क तक मटर खच्चरों की पीठ पर लादकर पहुंचानी पड़ रही है। एक तरफ की ढुलाई के लिए करीब 100 रुपये देने पड़ते हैं। आने-जाने का खर्च जोड़ें तो किसान को करीब 200 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
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यानी फसल तैयार करने में महीनों की मेहनत के बाद उसे बेचने के लिए भी किसानों को अतिरिक्त जेब ढीली करनी पड़ रही है। मटर के साथ दूसरी फसलों की ढुलाई का भी यही हाल है। सड़क तक पहुंचने के लिए खच्चरों पर निर्भरता गांवों की पुरानी मजबूरी बन चुकी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की सुविधा गांव तक पहुंचने से सबसे बड़ा फायदा किसानों को होगा। फसल की ढुलाई आसान होगी, समय बचेगा और हर सीजन में होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। किसानों के अनुसार वर्षों से सड़क का इंतजार है, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है। उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता वीरेंद्र कुमार ने बताया कि हाल ही में उनके पास क्षेत्र का चार्ज आया है। सड़क से संबंधित कोई प्रस्ताव उनके पास आता है तो समस्या के समाधान के लिए उचित प्रयास किए जाएंगे।
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खेत में फसल तैयार करने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन सड़क तक पहुंचाने के लिए फिर खच्चरों पर निर्भर होना पड़ता है। एक तरफ 100 रुपये देना पड़ता है। - केवल कुमार

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मटर की अच्छी फसल हुई है, मगर सड़क न होने के कारण उसे बाजार तक पहुंचाना मुश्किल है। ढुलाई का खर्च सीधे हमारी कमाई पर असर डालता है। - सुनील कुमार
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सालों से परेशानी झेल रहे हैं। हर फसल के समय खच्चरों की व्यवस्था करनी पड़ती है। सड़क गांव तक पहुंच जाए तो आधी समस्या खत्म हो जाएगी। - रतन चंद
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हम खेती छोड़ना नहीं चाहते, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में खेती करना लगातार महंगा होता जा रहा है। सरकार को सड़क की समस्या को प्राथमिकता देनी चाहिए। - तेज राम
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