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कुगति स्थित कार्तिक मंदिर के कपाट बंद
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भरमौर कार्तिक मंदिर के गर्भ गृह के अंदर रखी पानी की गड़वी।
- फोटो : Chamba
भरमौर (चंबा)। कार्तिक स्वामी मंदिर (केलंग) के कपाट मंगलवार को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए। अब 14 अप्रैल 2021 को बैसाखी के दिन मंदिर दोबारा श्रद्धालुुओं के लिए खोला जाएगा। मंदिर को बंद करने से पहले विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई।
पुजारी मचलू राम शर्मा ने बताया कि हर साल नवंबर के अंतिम सप्ताह विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उसके बाद करीब 134 दिन के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। गौरतलब है कि भरमौर के ऊपरी क्षेत्रों मणिमहेश, भरमाणी माता, दिगनपाल और कठेड़पाल में अक्तूबर माह के आखिर में बर्फबारी हो जाती है।
इसके साथ ही अंदरोल का समय शुरू हो जाता है। ऐसे समय ऊपरी क्षेत्रों के मंदिरों में जाना निषेध माना जाता है। कार्तिकेय मंदिर में इस बार कपाट बंद होने के दौरान हिमपात नहीं हुआ जबकि, बीते वर्ष बर्फबारी हो चुकी थी। ऐसी परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि शिव पुत्र कार्तिकेय सर्दियों में दक्षिण भारत के लिए प्रस्थान करते हैं। मंदिर के कपाट बंद करने से पहले गर्भगृह में जल से भरी गड़वी रखी जाती है।
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ऐसा माना जाता है कि मंदिर खुलने के बाद गड़वी के जल की मात्रा को देखकर क्षेत्र में आने वाले मौसम की भविष्यवाणी की जाती है। मान्यता है कि अगर गड़वी में पानी कम हो तो सूखे की स्थिति हो सकती है जबकि अधिक पानी होने को शुभ और अच्छी बारिश वाला साल माना जाता है।
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पुजारी मचलू राम शर्मा ने बताया कि हर साल नवंबर के अंतिम सप्ताह विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उसके बाद करीब 134 दिन के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। गौरतलब है कि भरमौर के ऊपरी क्षेत्रों मणिमहेश, भरमाणी माता, दिगनपाल और कठेड़पाल में अक्तूबर माह के आखिर में बर्फबारी हो जाती है।
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इसके साथ ही अंदरोल का समय शुरू हो जाता है। ऐसे समय ऊपरी क्षेत्रों के मंदिरों में जाना निषेध माना जाता है। कार्तिकेय मंदिर में इस बार कपाट बंद होने के दौरान हिमपात नहीं हुआ जबकि, बीते वर्ष बर्फबारी हो चुकी थी। ऐसी परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि शिव पुत्र कार्तिकेय सर्दियों में दक्षिण भारत के लिए प्रस्थान करते हैं। मंदिर के कपाट बंद करने से पहले गर्भगृह में जल से भरी गड़वी रखी जाती है।
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ऐसा माना जाता है कि मंदिर खुलने के बाद गड़वी के जल की मात्रा को देखकर क्षेत्र में आने वाले मौसम की भविष्यवाणी की जाती है। मान्यता है कि अगर गड़वी में पानी कम हो तो सूखे की स्थिति हो सकती है जबकि अधिक पानी होने को शुभ और अच्छी बारिश वाला साल माना जाता है।