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Chamba News: दुनाली और धन्छौ में बह गईं पुलियां, दोबारा चढ़नी पड़ी आठ किमी चढ़ाई

Fri, 29 Aug 2025 10:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Fri, 29 Aug 2025 10:55 PM IST
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The bridges were washed away in Dunali and Dhanchau, they had to climb eight km again
भरमौर से जैसे-तैसे जांधी पहुंचे घोड़ा-खच्चर मालिक आप बीती सुनाते हुए। संवाद
चंबा। मणिमहेश में 27 अगस्त को खराब हालात को देख अपनी खच्चरों के साथ डल झील से हड़सर के लिए रवाना हुए तो धन्छौ पहुंचने पर पानी का बहाव काफी बढ़ गया। दुनाली और धन्छौ में नाले पर बनीं दोनों पुलियां बह गईं। इसके बाद उन्होंने अपनी खच्चरों को लेकर वापस आठ किलोमीटर गौरीकुंड की चढ़ाई चढ़ी। वहां से दूसरी तरफ से हड़सर जाने वाले रास्ते से फिर से उतराई शुरू की। यह बात अपनी खच्चरों के साथ शुक्रवार को जांघी पहुंचे बोधराज, केवल और राहुल ने कही। उन्होंने कहा कि 27 अगस्त को मणिमहेश में भारी बारिश शुरू हो गई।
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प्रशासन की तरफ से यात्रा पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन श्रद्धालु सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए आवाजाही कर रहे थे। इसी बीच वे भी अपने 16 साथियों के साथ हड़सर को निकल पड़े, लेकिन जैसे ही धन्छौ पहुंचे तो नाले में पानी का सैलाब आ गया। यात्री सुरक्षित स्थानों की तरफ भागने लगे। नाले के साथ लगे लंगर का काफी सामान उसमें बह गया। हालांकि यात्री समय रहते वहां से निकल गए। उन्होंने कहा कि यात्रा में श्रद्धालुओं को खच्चरों पर ढोने का कार्य करने के लिए जम्मू के बणी से 16 लोग 16 खच्चरों के साथ मणिमहेश गए थे, जो कि काफी मुश्किल के साथ यहां पहुंचे। जैसे-तैसे करके जब वे हड़सर पहुंचे तो वहां से पैदल निकलना पड़ा। सड़क का कई जगह नामोनिशान मिट चुका था। जैसे-जैसे चंबा की तरफ बढ़ने लगे तो तबाही का मंजर उनकी आंखों के सामने आने लगा। सड़कें बह चुकी थीं। लोग पहाड़ों पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे थे। जब वह जांघी में सुरक्षित स्थान पर पहुंचे तो उनकी जान में जान आई। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से यात्रा के पड़ावों पर नुकसान हुआ है, उसमें श्रद्धालुओं की मदद के लिए प्रशासन के इंतजाम नाकाफी है।

भरमौर से जैसे-तैसे जांधी पहुंचे घोड़ा-खच्चर मालिक आप बीती सुनाते हुए। संवाद

भरमौर से जैसे-तैसे जांधी पहुंचे घोड़ा-खच्चर मालिक आप बीती सुनाते हुए। संवाद

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