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पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता की तैयारियों का लिया जायजा

Tue, 23 Nov 2021 09:42 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Nov 2021 09:42 PM IST
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Taking stock of preparations for paragliding competition
पर्यटन स्थल खज्जियार में पैरागलाइडिंग की तैयारियों का जायजा लेते सदर विधायक पवन नैयर व अन्य। - फोटो : Chamba
चंबा। मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से प्रख्यात खज्जियार को अब नई पहचान मिलने वाली है। 26 से 28 नवंबर तक खज्जियार में हिमालयन मोनाल नेशनल एरोफेस्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के 15 राज्यों के सौ से अधिक पैराग्लाइडर भाग ले रहे हैं। यह अपने आप में पहली ऐसी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसमें किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था भी मौजूद रहेगी।
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चंबा सदर विधायक पवन नैयर ने इस राष्ट्रीय स्तरीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता की तैयारियों का जायजा लिया। पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान देने के लिए चलो चंबा अभियान के तहत खजियार में होने वाली प्रतियोगिता के माध्यम से पूरे देश में खज्जियार एक नए आयाम को छुएगा। कहा कि सीएम ने जिला चंबा के विकास को लेकर विशेष तौर पर प्रयासरत हैं। सदर विधायक ने तैयारियों पर संतोष जताते हुए उपायुक्त डीसी राणा, एसडीएम नवीन तनवर, जिला पर्यटन अधिकारी विजय कुमार और लोक निर्माण विभाग मंडल चंबा के अधिशासी अभियंता जीत सिंह के कार्यों की सराहना की। कहा कि यूं तो खज्जियार में पिछले कई वर्षों से पैराग्लाइडिंग हो रही थी लेकिन, इस काम को अंजाम देने के लिए स्थानीय लोगों को चोरी-छिपे यह काम करना पड़ता था।
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प्रदेश सरकार ने सबसे पहले खज्जियार के दो स्थानों को पैराग्लाइडिंग के लिए न सिर्फ चिह्नित किया बल्कि उन्हें स्वीकृति भी प्रदान की। साथ ही पर्यटन विभाग ने 165 आउटडोर फोटोग्राफरों और 65 पैराग्लाइडरों को पंजीकृत किया। कहा कि अब यहां के लोगों को पैराग्लाइडिंग को अंजाम देने के लिए किसी से डरने की जरूरत नहीं है। कहा कि खज्जियार का मुख्य आकर्षण यहां की झील है और इस प्राकृतिक झील के स्वरूप को बचाए रखने के लिए लाखों रुपये खर्च करके इस झील की गाद को साफ करने का काम किया जा रहा है। चलो चंबा अभियान के तहत आयोजित होने वाली इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान प्रदेश के जनजाति क्षेत्रों की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। लाहौल स्पीति, किन्नौर और जिले के जनजातीय क्षेत्र भरमौर और पांगी के लोक कलाकार अपनी लोक संस्कृति को पेश करेंगे।
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