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ढोल-नगाड़ों की थाप पर सूही माता मेले का आगाज

Mon, 11 Apr 2022 09:48 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 09:48 PM IST
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Suhi Mata Fair begins on the beat of drums
चंबा में ऐतिहासिक सूही माता मेले के शुभारंभ पर पूजा करतीं राज कन्या शगुन वर्मन। - फोटो : Chamba
चंबा। जिले में ऐतिहासिक तीन दिवसीय सूही मेले का आगाज सोमवार को हो गया। इस मौके पर विधायक पवन नैयर विशेष रूप से उपस्थित रहे। सूही मेले के पहले दिन राजमहल (पिंक पैलेस) में राजघराने की कन्या शगुन वर्मन ने पूजा-अर्चना की। उसके बाद ढोल-नगाड़ों और गृहरक्षक बैंड की थाप पर नगर परिषद की ओर से राजमहल से लेकर सूही माता मंदिर तक शोभायात्रा निकाली गई। इसमें रानी सुनयना के पदचिह्नों को पालकी में रखकर शोभायात्रा के माध्यम से पिंक पैलेस से सूही माता मंदिर ले जाया गया। शोभायात्रा में स्कूली बच्चे, नप के पार्षद, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग शामिल रहे।
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शोभायात्रा में भरमौर क्षेत्र की गद्दी समुदाय की महिलाएं आकर्षण का केंद्र रहीं। उन्होंने पारंपरिक घुरैई गीत गाकर रानी सुनयना की गाथा गाई। मंगलवार को सूही माता मंदिर से रानी सुनयना की समाधि स्थल मलूणा तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। यहां राज घराने की कन्या पूजा-अर्चना करेंगी। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर उपायुक्त डीसी राणा, एसडीएम नवीन तनवर, नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैयर सहित विभिन्न वार्डों के पार्षद मौजूद रहे। गौरतलब है कि गत दो सालों में इस मेले का आयोजन धूमधाम से नहीं हो पाया था। कोरोना महामारी के चलते मेले की रस्म अदायगी ही की गई। इसमें कुछ ही लोग शामिल हुए थे लेकिन, अब कोरोना की स्थिति नियंत्रण में होने से मेले में काफी लोग शिरकत कर रहे हैं।
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रानी सुनयना ने दिया था बलिदान
मान्यता है कि 10वीं शताब्दी में चंबा शहर में अचानक सूखा पड़ गया था। शहर में पानी की किल्लत पैदा हो गई। नगरवासी पानी के लिए तरस गए। एक दिन राजा साहिल वर्मन की रानी सुनयना ने सपना देखा कि नगर में राजघराने से किसी की बलि चढ़ाने के बाद पानी की किल्लत दूर होगी। नगर को जलसंकट से बचाने के लिए रानी सुनयना ने अपना बलिदान दे दिया। उसके बाद आज तक बैसाखी पर तीन दिवसीय सूही मेले का आयोजन किया जाता है।
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