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केंद्रीय ट्रेड युनियनों ने जिला मुख्यालय में किया विरोध प्रदर्शन
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चंबा। केंद्रीय ट्रेड यूनियन मंच के आह्वान पर शुक्रवार को जिला मुख्यालय चंबा में विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मजदूरों की मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। साथ ही मजदूरों पर हो रहे शोषण को बंद करने की मांग की गई है। सीटू के जिला अध्यक्ष नरेंद्र, इंटक जिला अध्यक्ष हितेंद्र सिंह पठानिया और सीटू जिला सचिव सुदेश ठाकुर ने संयुक्त ब्यान जारी करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के चलते देश में लगभग 14 करोड़ लोगों की नौकरी जा चुकी है। कारखानों में मजदूरों की बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है।
मजदूरों को मालिकों की ओर से अप्रैल, मई और जून का वेतन तक नहीं दिया गया है। जिसकी वजह से मजदूर भूख से तड़प रहे हैं, परंतु सरकार कुछ भी नहीं कर रही है। इस दौरान भूख से देश में लगभग 900 लोगों को जान से भी हाथ धोना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार पूंजीपतियों से मिल कर श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव ला रही है। इससे आने वाले समय में मजदूरों का शोषण बढ़ेगा और पूंजीपतियों को अपनी मनमानी करने का पूरा अवसर मिलेगा। देश की केंद्र और कई राज्य सरकारों ने बड़े पैमाने पर श्रम कानूनों में बदलाव कर दिए हैं या प्रस्तावित हैं । इनमें फैक्टरी एक्ट, वेतन अधिनियम, कांट्रेक्ट लेबर एक्ट, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट में बदलाव, 8 घंटे की ड्यूटी 12 घंटे करना और मजदूरों के अधिकारों पर जबरदस्त हमला किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, त्रिपुरा, हिमाचल, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र ने श्रम कानून में बदलाव कर दिए हैं अथवा कुछ संशोधन प्रस्तावित हैं। इनका केंद्रीय ट्रेड यूनियन कड़ा विरोध करती हैं। इससे न केवल मजदूरों की छंटनी होगी, बल्कि बंधुआ मजदूरों की स्थिति हो जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन से भी मांग की है कि मजदूर जो निजी क्षेत्र में काम करते हैं, उन्हे लॉकडाउन के समय के वेतन का भुगतान करवाया जाए। सरकार और प्रशासन यूनियनों की मांगों पर गौर नहीं करते हैं तो आने वाले समय में पूरे देश में मेहनतकश जनता के आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।
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मजदूरों को मालिकों की ओर से अप्रैल, मई और जून का वेतन तक नहीं दिया गया है। जिसकी वजह से मजदूर भूख से तड़प रहे हैं, परंतु सरकार कुछ भी नहीं कर रही है। इस दौरान भूख से देश में लगभग 900 लोगों को जान से भी हाथ धोना पड़ा है।
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उन्होंने कहा कि सरकार पूंजीपतियों से मिल कर श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव ला रही है। इससे आने वाले समय में मजदूरों का शोषण बढ़ेगा और पूंजीपतियों को अपनी मनमानी करने का पूरा अवसर मिलेगा। देश की केंद्र और कई राज्य सरकारों ने बड़े पैमाने पर श्रम कानूनों में बदलाव कर दिए हैं या प्रस्तावित हैं । इनमें फैक्टरी एक्ट, वेतन अधिनियम, कांट्रेक्ट लेबर एक्ट, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट में बदलाव, 8 घंटे की ड्यूटी 12 घंटे करना और मजदूरों के अधिकारों पर जबरदस्त हमला किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, त्रिपुरा, हिमाचल, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र ने श्रम कानून में बदलाव कर दिए हैं अथवा कुछ संशोधन प्रस्तावित हैं। इनका केंद्रीय ट्रेड यूनियन कड़ा विरोध करती हैं। इससे न केवल मजदूरों की छंटनी होगी, बल्कि बंधुआ मजदूरों की स्थिति हो जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन से भी मांग की है कि मजदूर जो निजी क्षेत्र में काम करते हैं, उन्हे लॉकडाउन के समय के वेतन का भुगतान करवाया जाए। सरकार और प्रशासन यूनियनों की मांगों पर गौर नहीं करते हैं तो आने वाले समय में पूरे देश में मेहनतकश जनता के आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।
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