फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   Root borer's shadow enters apple roots

Chamba News: सेब की जड़ों में घुसा रूट बोरर का साया

Sat, 23 May 2026 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Sat, 23 May 2026 10:57 PM IST
विज्ञापन
Root borer's shadow enters apple roots
साहो क्षेत्र में सेब के पौधो में लगा कीड़ा:संवाद
साहो क्षेत्र के बागवानों की बढ़ी चिंता, जड़ों को खोखला कर रहा खतरनाक कीड़ा
विज्ञापन

पहले ओलों की मार से पहुंचा नुकसान, अब रूट बोरर कीड़े से सूखने लगे पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। क्षेत्र में सेब के बागानों ने नई आर्थिक उम्मीदें जगाई थीं, वहीं अब मिट्टी के भीतर छिपा रूट बोरर उस उम्मीद को धीरे-धीरे खोखला कर रहा है।
पौधे बाहर से हरे दिखते हैं लेकिन जड़ों के अंदर चल रही यह अदृश्य तबाही पूरे बागवानी तंत्र को हिला रही है। ओलावृष्टि की मार से उबरने की कोशिश कर रहे बागवानों के सामने अब यह कीट एक और गंभीर चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। सेब बागवानी रूट बोरर नामक खतरनाक कीड़े के प्रकोप से जूझ रही है।
साहो क्षेत्र सहित कई ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में युवा स्वरोजगार के रूप में सेब की उच्च घनत्व खेती को अपना रहे हैं। पौधों में फैल रही यह बीमारी बागवानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। बागवानों के अनुसार रूट बोरर कीड़ा सेब के पौधों की जड़ों में घुसकर उन्हें अंदर से खोखला कर देता है। धीरे-धीरे पौधों का रस चूसता रहता है। इससे पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं। शुरुआत में इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता लेकिन समय पर उपचार न मिलने पर बरसात के मौसम में पौधे सूखने लगते हैं। कई बागवानों के बगीचों में इस कीड़े के कारण पौधे नष्ट होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
विज्ञापन

बागवानों में रतन चंद्र, राकेश कुमार, संजीव कुमार, कमलेश कुमार, धनेश कुमार, मान सिंह, भानु राम, राम सिंह, उत्तम चंद और पविंद्र कुमार ने उद्यान विभाग से मांग की है कि गांव-गांव जाकर किसानों को इस बीमारी की पहचान और रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
विशेषज्ञों की सलाह से करें दवा का छिड़काव
उद्यान विभाग के उपनिदेशक प्रमोद शाह ने बताया कि यदि सेब के पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें, पौधा मुरझाने लगे या सूखने की स्थिति में पहुंच जाए तो यह रूट बोरर के लक्षण हो सकते हैं। बागवान तुरंत विभागीय विशेषज्ञों से संपर्क करें। रूट बोरर और रिंग बोरर दोनों अलग-अलग प्रकार के कीड़े हैं। सही पहचान के बाद ही उपचार संभव है। उन्होंने सलाह दी कि रूट बोरर के प्रकोप की स्थिति में लिथिल 4 एमएम दवा को एक लीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ों में डालें और विशेषज्ञों की सलाह अनुसार सोलोमन दवा का छिड़काव करें। समय पर स्प्रे और उचित देखभाल से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
--
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed