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Chamba News: प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को छह महीने तक छोड़ना पड़ता है घर
Thu, 19 Sep 2024 10:06 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 19 Sep 2024 10:06 PM IST
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पांगी (चंबा)। कबायली क्षेत्र पांगी की महिलाओं को संस्थागत प्रसव करवाने के लिए छह माह घर से दूर रहना पड़ता है। उन्हें 220 से 632 किलोमीटर दूर कुल्लू या चंबा में क्वार्टर लेना पड़ता है।
संस्थागत प्रसव करवाना गर्भवती महिलाओं के परिवारों के लिए काफी महंगा साबित होता है। हालांकि, सिविल अस्पताल किलाड़ में 40 वर्ष पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन है। इसे संचालित करना रेडियोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण अर्जित कर लौटे चिकित्सक के बस की बात नहीं है। चिकित्सक ने स्वास्थ्य विभाग से अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध करवाने को लेकर बाकायदा पत्र भी लिखा है। पांगी की पंचायतें ग्राम पंचायत मिंधल, करियास, किलाड़, किलाड़-प्रथम, करयूनी, फिंडरू, मिंधल, रैई, शौर, पुर्थी, साच, कुमार, साहली, सेचू, हुड़ान, लुज, धरवास, सुराल, शुण-उदीन पंचायतों की 30 हजार की आबादी के लिए खुले सिविल अस्पताल किलाड़ का गर्भवती महिलाओं को लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पताल में मरीजों की ईसीजी भी नहीं हो रही है। पांगीवासियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पांगी अस्पताल में अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध करवाने को लेकर आवाज उठाई है।
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परिचर्चा
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जनजातीय क्षेत्र पांगी में जनवरी में होने वाले प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं को किलाड़ से कुल्लू तक 220 किमी सफर या किलाड़-चंबा वाया लाहौल-स्पीति होते हुए 632, किलाड़ से वाया पधरी जोत 442 किमी का सफर तय कर पहुंचना पड़ता है। - भागदेई, मिंधल
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अक्तूबर से लेकर मार्च या अप्रैल तक भारी बर्फबारी के चलते जनजातीय क्षेत्र पांगी के लोग घरों में कैद हो जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को लेकर पहले ही उनके परिजनों को चंबा या कुल्लू में क्वार्टर लेकर रहना पड़ता है। - इंदु कुमारी, वार्ड सदस्य, उदीन पंचायत
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सिविल अस्पताल किलाड़ में पांगी की पंचायत मिंधल, करियास, किलाड़, किलाड़-प्रथम, करयूनी, फिंडरू, मिंधल समेत अन्य पंचायतों की 30 हजार की आबादी स्वास्थ्य सुविधा के लिए निर्भर है। अल्ट्रासाउंड सुविधा न मिलना चुनौती से कम नही है। - त्रिलोक ठाकुर, किलाड़
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अस्पताल में 40 वर्ष पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है। अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक रेडियोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण प्राप्त कर आ चुके हैं, लेकिन पुरानी मशीन के ऑपरेटर न होने से मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। - केदार राणा, किलाड़
-- बीएमओ किलाड़ डॉ. सुभाष ठाकुर ने बताया कि पांगी घाटी में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। एक चिकित्सक को प्रशिक्षण दिया गया है। अत्याधुनिक मशीन खरीदने को लेकर सरकार और विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित में अवगत करवाया गया है।
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संस्थागत प्रसव करवाना गर्भवती महिलाओं के परिवारों के लिए काफी महंगा साबित होता है। हालांकि, सिविल अस्पताल किलाड़ में 40 वर्ष पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन है। इसे संचालित करना रेडियोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण अर्जित कर लौटे चिकित्सक के बस की बात नहीं है। चिकित्सक ने स्वास्थ्य विभाग से अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध करवाने को लेकर बाकायदा पत्र भी लिखा है। पांगी की पंचायतें ग्राम पंचायत मिंधल, करियास, किलाड़, किलाड़-प्रथम, करयूनी, फिंडरू, मिंधल, रैई, शौर, पुर्थी, साच, कुमार, साहली, सेचू, हुड़ान, लुज, धरवास, सुराल, शुण-उदीन पंचायतों की 30 हजार की आबादी के लिए खुले सिविल अस्पताल किलाड़ का गर्भवती महिलाओं को लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पताल में मरीजों की ईसीजी भी नहीं हो रही है। पांगीवासियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पांगी अस्पताल में अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध करवाने को लेकर आवाज उठाई है।
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परिचर्चा
जनजातीय क्षेत्र पांगी में जनवरी में होने वाले प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं को किलाड़ से कुल्लू तक 220 किमी सफर या किलाड़-चंबा वाया लाहौल-स्पीति होते हुए 632, किलाड़ से वाया पधरी जोत 442 किमी का सफर तय कर पहुंचना पड़ता है। - भागदेई, मिंधल
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अक्तूबर से लेकर मार्च या अप्रैल तक भारी बर्फबारी के चलते जनजातीय क्षेत्र पांगी के लोग घरों में कैद हो जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को लेकर पहले ही उनके परिजनों को चंबा या कुल्लू में क्वार्टर लेकर रहना पड़ता है। - इंदु कुमारी, वार्ड सदस्य, उदीन पंचायत
सिविल अस्पताल किलाड़ में पांगी की पंचायत मिंधल, करियास, किलाड़, किलाड़-प्रथम, करयूनी, फिंडरू, मिंधल समेत अन्य पंचायतों की 30 हजार की आबादी स्वास्थ्य सुविधा के लिए निर्भर है। अल्ट्रासाउंड सुविधा न मिलना चुनौती से कम नही है। - त्रिलोक ठाकुर, किलाड़
अस्पताल में 40 वर्ष पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है। अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक रेडियोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण प्राप्त कर आ चुके हैं, लेकिन पुरानी मशीन के ऑपरेटर न होने से मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। - केदार राणा, किलाड़