{"_id":"69443888504e2a7dd904b966","slug":"petition-for-compensation-for-vehicle-accident-dismissed-chamba-news-c-88-1-ssml1004-169528-2025-12-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: वाहन दुर्घटना पर मुआवजा राशि देने की याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: वाहन दुर्घटना पर मुआवजा राशि देने की याचिका खारिज
Thu, 18 Dec 2025 10:53 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 18 Dec 2025 10:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंबा। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण चंबा में प्रीति ठाकुर की अदालत ने वाहन दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति की मुआवजा राशि प्रदान करवाने की याचिका को खारिज कर दिया है।
जानकारी के अनुसार 28 फरवरी 2016 को ज्ञान चंद अपने भाई की मारुति कार चला रहे थे और ढकोग के पास तकनीकी खराबी के चलने वाहन नदी में जा गिरा। दुर्घटना में ज्ञान चंद की मौत हो गई। मृतक परिवार ने न्यायालय में याचिका लगाई कि घर का एकमात्र कमाने वाला था और पूरा परिवार उस पर निर्भर था।
याचिकाकर्ताओं ने उन्हें 15 लाख का मुआवजा 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित प्रदान करने का आग्रह किया। याचिका के दौरान उन्होंने वाहन मालिक वैध बीमा पॉलिसी भी लगाई, जो, 12 अगस्त 2015 से 11 अगस्त 2016 तक बीमित था। वहीं, प्रतिवादी ने बताया कि कार चला रहे व्यक्ति के कोई वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।
विज्ञापन
इसके अलावा ज्ञान चंद के एनएचपीसी-तृतीय में नियमित इलेक्ट्रीशियन के रूप में कार्यरत होने का तर्क देते हुए याचिका खारिज करने का आग्रह किया। न्यायालय ने समस्त दस्तावेज और सबूतों को देखते हुए मुआवजा राशि प्रदान करवाने की याचिका को खारिज कर दी।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार 28 फरवरी 2016 को ज्ञान चंद अपने भाई की मारुति कार चला रहे थे और ढकोग के पास तकनीकी खराबी के चलने वाहन नदी में जा गिरा। दुर्घटना में ज्ञान चंद की मौत हो गई। मृतक परिवार ने न्यायालय में याचिका लगाई कि घर का एकमात्र कमाने वाला था और पूरा परिवार उस पर निर्भर था।
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं ने उन्हें 15 लाख का मुआवजा 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित प्रदान करने का आग्रह किया। याचिका के दौरान उन्होंने वाहन मालिक वैध बीमा पॉलिसी भी लगाई, जो, 12 अगस्त 2015 से 11 अगस्त 2016 तक बीमित था। वहीं, प्रतिवादी ने बताया कि कार चला रहे व्यक्ति के कोई वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।
विज्ञापन
इसके अलावा ज्ञान चंद के एनएचपीसी-तृतीय में नियमित इलेक्ट्रीशियन के रूप में कार्यरत होने का तर्क देते हुए याचिका खारिज करने का आग्रह किया। न्यायालय ने समस्त दस्तावेज और सबूतों को देखते हुए मुआवजा राशि प्रदान करवाने की याचिका को खारिज कर दी।