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एचआरटीसी बसों की मरम्मत के लिए नहीं स्टाफ
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एचआरटीसी वर्कशॉप में बस की वेल्डिंग करते हुए कर्मी।
- फोटो : Chamba
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चंबा। जिले के एक मात्र एचआरटीसी बस डिपो में मेकेनिक विंग में स्टाफ की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
मेकेनिक विंग में स्वीकृत 70 में से महज 35 पदों पर ही कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में बसों की मरम्मत के लिए इन कर्मियों को दोगुना काम करना पड़ रहा है। संवाददाता ने शनिवार को एचआरटीसी कार्यशाला में जाकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान पाया गया कि एचआरटीसी कार्यशाला में कर्मचारी छह बसों की मरम्मत में जुटे हुए हैं जबकि तीन बसें मरम्मत के लिए खड़ी हैं।
ये कर्मचारी पहले रूट पर जाने वाली बसों की मरम्मत प्रमुखता से कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिले में एचआरटीसी की 155 बसें हैं। इनमें से नियमित तौर पर 110 बसें रूट पर दौड़ रही हैं। रूट पर भेजने से पहले और वापस आने वाली बसों की पूरी तरह जांच की जा रही है। इसके अलावा अन्य खराब खड़ी छह बसों को भी कर्मी किसी तरह समय निकालकर उन्हें दुरुस्त कर रहे हैं। जिले के डिपो को पिछले चार सालों से कोई भी नई बस नहीं मिल पाई है। आए दिन रूट पर जा रही बसें बीच राह दम तोड़ रही हैं। इससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।
हालात यह हैं कि वर्तमान में एचआरटीसी कार्यालय में करीब 12 परिचालक दफ्तर में में ड्यूटी दे रहे हैं। कार्यालय में स्टाफ के पद खाली होने के कारण ऐसी व्यवस्था बनानी पड़ रही है।
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कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक साहिल कपूर का कहना है कि मेकेनिक विंग में पचास पद प्रतिशत रिक्त हैं। कहा कि इसके बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। कहा कि वर्तमान में तैनात कर्मी भी अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
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मेकेनिक विंग में स्वीकृत 70 में से महज 35 पदों पर ही कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में बसों की मरम्मत के लिए इन कर्मियों को दोगुना काम करना पड़ रहा है। संवाददाता ने शनिवार को एचआरटीसी कार्यशाला में जाकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान पाया गया कि एचआरटीसी कार्यशाला में कर्मचारी छह बसों की मरम्मत में जुटे हुए हैं जबकि तीन बसें मरम्मत के लिए खड़ी हैं।
ये कर्मचारी पहले रूट पर जाने वाली बसों की मरम्मत प्रमुखता से कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिले में एचआरटीसी की 155 बसें हैं। इनमें से नियमित तौर पर 110 बसें रूट पर दौड़ रही हैं। रूट पर भेजने से पहले और वापस आने वाली बसों की पूरी तरह जांच की जा रही है। इसके अलावा अन्य खराब खड़ी छह बसों को भी कर्मी किसी तरह समय निकालकर उन्हें दुरुस्त कर रहे हैं। जिले के डिपो को पिछले चार सालों से कोई भी नई बस नहीं मिल पाई है। आए दिन रूट पर जा रही बसें बीच राह दम तोड़ रही हैं। इससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।
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हालात यह हैं कि वर्तमान में एचआरटीसी कार्यालय में करीब 12 परिचालक दफ्तर में में ड्यूटी दे रहे हैं। कार्यालय में स्टाफ के पद खाली होने के कारण ऐसी व्यवस्था बनानी पड़ रही है।
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कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक साहिल कपूर का कहना है कि मेकेनिक विंग में पचास पद प्रतिशत रिक्त हैं। कहा कि इसके बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। कहा कि वर्तमान में तैनात कर्मी भी अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।