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Chamba News: रावी के किनारे सड़क नहीं, खतरे की रेखा बची
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चूड़ी क्षेत्र में आपदा के एक साल बाद भी नहीं बदली एनएच की तस्वीर
रावी में बह चुकी सड़क के स्थान पर मिट्टी बिछाकर बनाई है सड़क
वाहनों को वहां से लेकर जाना हो रहा खतरनाक, नहीं ली जा रही सुध
संवाद न्यूज एजेंसी
धरवाला (चंबा)। मानसून की आहट के बीच चूड़ी क्षेत्र में एनएच की बदहाली एक बार फिर लोगों के लिए खतरे की घंटी बन गई है। पिछले साल आई आपदा में रावी नदी में बह चुके हिस्से को आज भी केवल मिट्टी डालकर अस्थायी रूप से जोड़ा गया है जबकि पक्की सड़क और सुरक्षा दीवारों का काम अधर में लटका है। वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है और किसानों की जमीन भी लगातार कटाव के खतरे में है जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आपदा में लोगों की जमीन बह गई थी। बची हुई जमीन को सुरक्षित करने के लिए भी कदम नहीं उठाए गए हैं। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों में शासन और प्रशासन के खिलाफ रोष है। पिछले साल आपदा में चूड़ी के पास 150 मीटर सड़क का नामोनिशान मिट गया था। वहां मिट्टी बिछाकर गाड़ियों की आवाजाही शुरू की गई। आज भी वैसे ही हालात हैं।
प्रभावित किसान सोरमा राम, मनोज कुमार, जगदीश ठाकुर, रविंद्र कुमार और राज कुमार ने बताया कि उनकी जमीन को खतरा पैदा हो गया है। बरसात शुरू होने से पहले वहां डंगे नहीं लगाए गए तो बची हुई जमीन भी नीचे खिसक सकती है। ऐसा होने पर किसानों के पास खेती के लिए जमीन नहीं बचेगी। शासन और प्रशासन को कई बार सूचित किया गया लेकिन किसी ने भी वहां जाकर वस्तुस्थिति का पता लगाने का प्रयास नहीं किया। नुकसान की रिपोर्ट भी पटवारी ने अपने कार्यालय में बैठकर बनाई। शासन व प्रशासन की लचर व्यवस्था यह दर्शाती है कि उन्हें लोगों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। एनएच के सहायक अभियंता वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि एनएच की मरम्मत के लिए 60 करोड़ के टेंडर हो चुके हैं। जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू होने वाले हैं।
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-- रावी के मुहाने पर अधूरे पड़े हैं डंगों के निर्माण कार्यरावी के मुहाने से गुजरते क्षतिग्रस्त एनएच पर डंगों के कार्य अधूरे पड़े हैं। एक वाहन के पीछे दूसरे वाहन को चलाना मुश्किल हो जाता है। इतनी अधिक मात्रा में धूल उड़ती है कि पीछे चलने वाले वाहन को आगे रास्ता भी नजर नहीं आता। जरा सी भूल होने पर दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।
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रावी में बह चुकी सड़क के स्थान पर मिट्टी बिछाकर बनाई है सड़क
वाहनों को वहां से लेकर जाना हो रहा खतरनाक, नहीं ली जा रही सुध
संवाद न्यूज एजेंसी
धरवाला (चंबा)। मानसून की आहट के बीच चूड़ी क्षेत्र में एनएच की बदहाली एक बार फिर लोगों के लिए खतरे की घंटी बन गई है। पिछले साल आई आपदा में रावी नदी में बह चुके हिस्से को आज भी केवल मिट्टी डालकर अस्थायी रूप से जोड़ा गया है जबकि पक्की सड़क और सुरक्षा दीवारों का काम अधर में लटका है। वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है और किसानों की जमीन भी लगातार कटाव के खतरे में है जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आपदा में लोगों की जमीन बह गई थी। बची हुई जमीन को सुरक्षित करने के लिए भी कदम नहीं उठाए गए हैं। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों में शासन और प्रशासन के खिलाफ रोष है। पिछले साल आपदा में चूड़ी के पास 150 मीटर सड़क का नामोनिशान मिट गया था। वहां मिट्टी बिछाकर गाड़ियों की आवाजाही शुरू की गई। आज भी वैसे ही हालात हैं।
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प्रभावित किसान सोरमा राम, मनोज कुमार, जगदीश ठाकुर, रविंद्र कुमार और राज कुमार ने बताया कि उनकी जमीन को खतरा पैदा हो गया है। बरसात शुरू होने से पहले वहां डंगे नहीं लगाए गए तो बची हुई जमीन भी नीचे खिसक सकती है। ऐसा होने पर किसानों के पास खेती के लिए जमीन नहीं बचेगी। शासन और प्रशासन को कई बार सूचित किया गया लेकिन किसी ने भी वहां जाकर वस्तुस्थिति का पता लगाने का प्रयास नहीं किया। नुकसान की रिपोर्ट भी पटवारी ने अपने कार्यालय में बैठकर बनाई। शासन व प्रशासन की लचर व्यवस्था यह दर्शाती है कि उन्हें लोगों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। एनएच के सहायक अभियंता वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि एनएच की मरम्मत के लिए 60 करोड़ के टेंडर हो चुके हैं। जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू होने वाले हैं।
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