{"_id":"66d0a22ae7adca6f4d032e75","slug":"no-machine-for-testing-how-will-experts-treat-eye-inflammation-chamba-news-c-88-1-ssml1006-132014-2024-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: जांच के लिए मशीन नहीं, कैसे आंखों की सूजन का इलाज करेंगे विशेषज्ञ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: जांच के लिए मशीन नहीं, कैसे आंखों की सूजन का इलाज करेंगे विशेषज्ञ
Thu, 29 Aug 2024 10:00 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 29 Aug 2024 10:00 PM IST
विज्ञापन
चंबा मेडिकल की नेत्र रोग ओपीडी के बाहर लगी लोगो की भीड़।संवाद
चंबा। आंखों की गंभीर और सूजन की बीमारी का पीजीआई में प्रशिक्षण लेने के बाद भी विशेषज्ञ चंबा में मरीजों की आंखों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए जो मशीन चाहिए, वह उपलब्ध नहीं हो रही है।
चंबा मेडिकल कॉलेज प्रदेश में अकेला ऐसा मेडिकल कॉलेज है, जहां के नेत्र रोग विशेषज्ञ ने पीजीआई में आंखों की सूजन की बीमारी का इलाज करने की एक साल की फैलोशिप की है। चंबा में उनके पास जरूरी मशीन ही नहीं है। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में आंखों की जांच करने वाली ओसीटी मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन उनके पास आंखों की सूजन का इलाज करने वाला विशेषज्ञ नहीं है। इस बीमारी का इलाज करने से पहले यूवीईआईटीआईएस टेस्ट करवाना जरूरी होता है। इस टेस्ट में आंखों की सूजन की पचास बीमारियों का पता लगता है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त होने वाले टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को पठानकोट में पांच हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। दो से तीन हजार में उनका यह टेस्ट हो रहा है। दो से तीन हजार रुपये आने-जाने पर खर्च हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज की नेत्र ओपीडी में रोजाना करीब 100 मरीज पहुंचते हैं। इनमें चार से पांच मरीज ऐसे होते हैं, जिनकी आंखों की बीमारी का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ उन्हें यूवीईआईटीआईएस आकांक्षी टेस्ट करवाने के लिए टांडा रेफर करते हैं। चंबा में कहीं भी यह टेस्ट नहीं होता है। रोजाना चार से पांच मरीज टांडा रेफर किए जा रहे हैं। वहां भी समय पर टेस्ट न होने से मरीज पठानकोट में जाकर टेस्ट करवाते हैं।
विज्ञापन
--
आंख की सूजन की बीमारी में शुरुआती तौर पर मरीज की आंख लाल होती है। आंख में दर्द, काले धब्बे और धुंधलापन आने लगता है। ऐसे लक्षणों में मरीज को तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।
--
आंख की सूजन की बीमारी का समय पर इलाज न किया तो मरीज को हमेशा के लिए आंख की रोशनी गंवानी पड़ सकती है। इसलिए लक्षण आने पर मरीज को आंखों की जांच में देर नहीं करनी चाहिए।
--
प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा डॉक्टर एसएस डोगरा ने बताया कि सरकार चंबा मेडिकल कॉलेज के लिए जल्द नई मशीनें खरीदने वाली है। नेत्र रोग विभाग को भी जल्द यह मशीन उपलब्ध करवाई जाएगी।
--
विज्ञापन
चंबा मेडिकल कॉलेज प्रदेश में अकेला ऐसा मेडिकल कॉलेज है, जहां के नेत्र रोग विशेषज्ञ ने पीजीआई में आंखों की सूजन की बीमारी का इलाज करने की एक साल की फैलोशिप की है। चंबा में उनके पास जरूरी मशीन ही नहीं है। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में आंखों की जांच करने वाली ओसीटी मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन उनके पास आंखों की सूजन का इलाज करने वाला विशेषज्ञ नहीं है। इस बीमारी का इलाज करने से पहले यूवीईआईटीआईएस टेस्ट करवाना जरूरी होता है। इस टेस्ट में आंखों की सूजन की पचास बीमारियों का पता लगता है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त होने वाले टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को पठानकोट में पांच हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। दो से तीन हजार में उनका यह टेस्ट हो रहा है। दो से तीन हजार रुपये आने-जाने पर खर्च हो रहा है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज की नेत्र ओपीडी में रोजाना करीब 100 मरीज पहुंचते हैं। इनमें चार से पांच मरीज ऐसे होते हैं, जिनकी आंखों की बीमारी का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ उन्हें यूवीईआईटीआईएस आकांक्षी टेस्ट करवाने के लिए टांडा रेफर करते हैं। चंबा में कहीं भी यह टेस्ट नहीं होता है। रोजाना चार से पांच मरीज टांडा रेफर किए जा रहे हैं। वहां भी समय पर टेस्ट न होने से मरीज पठानकोट में जाकर टेस्ट करवाते हैं।
विज्ञापन
आंख की सूजन की बीमारी में शुरुआती तौर पर मरीज की आंख लाल होती है। आंख में दर्द, काले धब्बे और धुंधलापन आने लगता है। ऐसे लक्षणों में मरीज को तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।
आंख की सूजन की बीमारी का समय पर इलाज न किया तो मरीज को हमेशा के लिए आंख की रोशनी गंवानी पड़ सकती है। इसलिए लक्षण आने पर मरीज को आंखों की जांच में देर नहीं करनी चाहिए।
प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा डॉक्टर एसएस डोगरा ने बताया कि सरकार चंबा मेडिकल कॉलेज के लिए जल्द नई मशीनें खरीदने वाली है। नेत्र रोग विभाग को भी जल्द यह मशीन उपलब्ध करवाई जाएगी।