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Chamba News: दो माह से नहीं बरसे मेघ, गेहूं की फसल सूखने के कगार पर
Mon, 08 Dec 2025 11:02 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 08 Dec 2025 11:02 PM IST
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चंबा। जिले में दो महीनों से बारिश न होने के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सामान्यतः इस समय तक खेतों में गेहूं की फसल हरी-भरी दिखाई देने लगती है, लेकिन इस वर्ष हालात विपरीत हैं। पर्याप्त नमी न मिलने के कारण गेहूं की फसल मुरझाने लगी है और कई क्षेत्रों में यह सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
किसानों का कहना है कि सिंचाई के इंतजाम न होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें दम तोड़ रही हैं। कृषि विभाग के अनुसार जिले के लगभग 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है, जो यहां की प्रमुख कृषि गतिविधियों में से एक है। यदि जल्द बारिश नहीं होती, तो पूरी फसल नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
चंबा, भरमौर, सलूणी, तीसा, साहों सहित विभिन्न क्षेत्रों के किसानों के चेहरों पर निराशा साफ झलक रही है। किसान धर्म पाल, बिहारी लाल, मनोहर लाल, दीपक कुमार, हरीश कुमार और संदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने कड़ी मेहनत से गेहूं बोई थी, लेकिन पानी की कमी के कारण फसल सूखने लगी है। खेतों में रोजाना मेहनत करने के बावजूद पानी के अभाव में वे असहाय महसूस कर रहे हैं।
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हालात इतने खराब हैं कि किसान अब मंदिरों में जाकर बारिश की दुआ कर रहे हैं। कई स्थानों पर किसान सामूहिक रूप से प्रार्थनाएं कर रहे हैं ताकि समय पर बारिश हो और उनकी मेहनत बच सके।
जल सरंक्षण करें और नमी बनाए रखें
किसानों को सलाह है कि वे जल संरक्षण और मिट्टी की नमी बनाए रखने के उपाय अपनाएं। वर्तमान परिस्थितियों में फसल को बचाने के लिए बारिश अत्यंत आवश्यक हो गई है। डॉ. भूपेंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग
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किसानों का कहना है कि सिंचाई के इंतजाम न होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें दम तोड़ रही हैं। कृषि विभाग के अनुसार जिले के लगभग 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है, जो यहां की प्रमुख कृषि गतिविधियों में से एक है। यदि जल्द बारिश नहीं होती, तो पूरी फसल नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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चंबा, भरमौर, सलूणी, तीसा, साहों सहित विभिन्न क्षेत्रों के किसानों के चेहरों पर निराशा साफ झलक रही है। किसान धर्म पाल, बिहारी लाल, मनोहर लाल, दीपक कुमार, हरीश कुमार और संदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने कड़ी मेहनत से गेहूं बोई थी, लेकिन पानी की कमी के कारण फसल सूखने लगी है। खेतों में रोजाना मेहनत करने के बावजूद पानी के अभाव में वे असहाय महसूस कर रहे हैं।
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हालात इतने खराब हैं कि किसान अब मंदिरों में जाकर बारिश की दुआ कर रहे हैं। कई स्थानों पर किसान सामूहिक रूप से प्रार्थनाएं कर रहे हैं ताकि समय पर बारिश हो और उनकी मेहनत बच सके।
जल सरंक्षण करें और नमी बनाए रखें
किसानों को सलाह है कि वे जल संरक्षण और मिट्टी की नमी बनाए रखने के उपाय अपनाएं। वर्तमान परिस्थितियों में फसल को बचाने के लिए बारिश अत्यंत आवश्यक हो गई है। डॉ. भूपेंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग