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Chamba News: पहाड़ों में सेब नहीं, नई सोच दे रही फल
Wed, 24 Jun 2026 11:10 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:10 PM IST
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हाई-डेंसिटी सेब बागानों ने बढ़ाई किसानों की उम्मीदें, प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर रही फल-सेटिंग
हाई-डेंसिटी सेब बगानों ने बढ़ाईं उम्मीदें, प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर रही फल-सेटिंग
उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक और उपनिदेशक ने किया चुराह क्षेत्र के बगानों का निरीक्षण
उच्च गुणवत्ता वाली सेब और अन्य फलों के प्रजातियों के पौधों के रोपण की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। बदलते मौसम और घटती फल-सेटिंग की चिंताओं के बीच चुराह के हाई-डेंसिटी सेब बगानों ने उम्मीदों की ऐसी हरियाली दिखाई है जिसने बागवानों के चेहरों पर नई मुस्कान लौटा दी है।
क्लोनल रूट स्टॉक आधारित इन आधुनिक बगानों में बेहतर फल-सेटिंग ने साबित किया है कि वैज्ञानिक तकनीक अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि पहाड़ों की बागवानी का भविष्य बन चुकी हैं।
उद्यान विभाग के कांगड़ा जोन के संयुक्त निदेशक डॉ. कमल शील नेगी और उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने कीड़ी, तीसा, डियूर, सलूणी और किलोड़ क्षेत्रों का संयुक्त क्षेत्रीय भ्रमण कर विभिन्न उद्यानिकी गतिविधियों और प्रगतिशील बागवानों के बागानों का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने प्रगतिशील बागवान संजीव और रमेश के क्लोनल रूट स्टॉक पर स्थापित हाई-डेंसिटी सेब बगानों का भ्रमण। बागवानों ने बताया कि इस आधुनिक प्रणाली से उन्हें बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। भविष्य में इसके माध्यम से अधिक उत्पादन तथा बेहतर आय की व्यापक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
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अधिकारियों ने पाया कि चालू वर्ष में प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों के कारण पारंपरिक बीज मूल वृत पर स्थापित सेब बागानों में फल-सेटिंग काफी कम रही है जबकि क्लोनल रूट स्टॉक आधारित हाई-डेंसिटी बागानों में फल-सेटिंग संतोषजनक और अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई। इन बागानों की शुरुआती फसल जुलाई में बाजार में पहुंचने की संभावना है। ऐसे में शुरुआती आवक का लाभ मिलने से उत्पादकों को अपनी गुणवत्तापूर्ण उपज के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विभागीय योजनाओं के तहत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, एंटी-हेल नेट तथा बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली सेब एवं अन्य फल प्रजातियों के पौधों के रोपण की जानकारी दी। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उद्यानों की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया। डॉ. प्रमोद शाह ने कहा कि बदलते मौसम के दौर में आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को अपनाना समय की जरूरत है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
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उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक और उपनिदेशक ने किया चुराह क्षेत्र के बगानों का निरीक्षण
उच्च गुणवत्ता वाली सेब और अन्य फलों के प्रजातियों के पौधों के रोपण की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। बदलते मौसम और घटती फल-सेटिंग की चिंताओं के बीच चुराह के हाई-डेंसिटी सेब बगानों ने उम्मीदों की ऐसी हरियाली दिखाई है जिसने बागवानों के चेहरों पर नई मुस्कान लौटा दी है।
क्लोनल रूट स्टॉक आधारित इन आधुनिक बगानों में बेहतर फल-सेटिंग ने साबित किया है कि वैज्ञानिक तकनीक अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि पहाड़ों की बागवानी का भविष्य बन चुकी हैं।
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उद्यान विभाग के कांगड़ा जोन के संयुक्त निदेशक डॉ. कमल शील नेगी और उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने कीड़ी, तीसा, डियूर, सलूणी और किलोड़ क्षेत्रों का संयुक्त क्षेत्रीय भ्रमण कर विभिन्न उद्यानिकी गतिविधियों और प्रगतिशील बागवानों के बागानों का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने प्रगतिशील बागवान संजीव और रमेश के क्लोनल रूट स्टॉक पर स्थापित हाई-डेंसिटी सेब बगानों का भ्रमण। बागवानों ने बताया कि इस आधुनिक प्रणाली से उन्हें बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। भविष्य में इसके माध्यम से अधिक उत्पादन तथा बेहतर आय की व्यापक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
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अधिकारियों ने पाया कि चालू वर्ष में प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों के कारण पारंपरिक बीज मूल वृत पर स्थापित सेब बागानों में फल-सेटिंग काफी कम रही है जबकि क्लोनल रूट स्टॉक आधारित हाई-डेंसिटी बागानों में फल-सेटिंग संतोषजनक और अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई। इन बागानों की शुरुआती फसल जुलाई में बाजार में पहुंचने की संभावना है। ऐसे में शुरुआती आवक का लाभ मिलने से उत्पादकों को अपनी गुणवत्तापूर्ण उपज के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विभागीय योजनाओं के तहत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, एंटी-हेल नेट तथा बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली सेब एवं अन्य फल प्रजातियों के पौधों के रोपण की जानकारी दी। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उद्यानों की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया। डॉ. प्रमोद शाह ने कहा कि बदलते मौसम के दौर में आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को अपनाना समय की जरूरत है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ भी मिलेगा।