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Chamba News: कैलाश की छांव में रात भर गूंजा शिव नाम, राधाष्टमी पर आस्था का स्नान
Fri, 18 Sep 2026 11:00 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:00 PM IST
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चंबा के मणिमहेश में डल झील तोड़ने की पंरपरा को निभाते शिव के गुर।संवाद
शुभ मुहूर्त पर डल में लगाई डुबकी, परंपरा के तहत चेलों को कंधों पर उठाकर आसन तक पहुंचाया
रातभर भजनों और जयकारों से गूंजता रहा मणिमहेश, डल तोड़ने की रस्म में उमड़ी श्रद्धा
रंजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। रात गहराती रही, लेकिन मणिमहेश में आस्था की लौ नहीं बुझी। कैलाश की छांव में श्रद्धालुओं की टोलियां पूरी रात भजन-कीर्तन में डूबी रहीं।
डल से उठते हर-हर महादेव के जयकारे पहाड़ियों में गूंजते रहे। शुक्रवार को राधाष्टमी का शुभ मुहूर्त आते ही श्रद्धालुओं ने पवित्र डल में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की। स्नान के बाद कई श्रद्धालु शिव भजनों पर झूमते नजर आए।
हालिया आपदा के बावजूद जम्मू-कश्मीर, भद्रवाह और डोडा समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं के उत्साह में कमी नहीं आई। डल के आसपास सुबह से ही श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही।
राधाष्टमी पर मणिमहेश की पारंपरिक डल तोड़ने की रस्म भी विधि-विधान से निभाई गई। कार्तिक स्वामी की अगुवाई में संचूई और त्रिलोचन महादेव के वंशजों ने पवित्र डल की परिक्रमा की। कार्तिक स्वामी के चेले से अनुमति मिलने के बाद डल झील तोड़ी गई। दूसरे छोर पर पहुंचे चेलों को श्रद्धालुओं ने कंधों पर उठाकर आसन तक पहुंचाया। मान्यता है कि चेलों को उनके स्थान तक पहुंचाने वाले श्रद्धालु पुण्य के भागी बनते हैं। इसके बाद श्रद्धालुओं ने चेलों से मनवांछित वर का आशीर्वाद लिया। मणिमहेश में राधाष्टमी का यह दृश्य आस्था, परंपरा और शिव भक्ति का अनूठा संगम बना रहा।
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रातभर भजनों और जयकारों से गूंजता रहा मणिमहेश, डल तोड़ने की रस्म में उमड़ी श्रद्धा
रंजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। रात गहराती रही, लेकिन मणिमहेश में आस्था की लौ नहीं बुझी। कैलाश की छांव में श्रद्धालुओं की टोलियां पूरी रात भजन-कीर्तन में डूबी रहीं।
डल से उठते हर-हर महादेव के जयकारे पहाड़ियों में गूंजते रहे। शुक्रवार को राधाष्टमी का शुभ मुहूर्त आते ही श्रद्धालुओं ने पवित्र डल में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की। स्नान के बाद कई श्रद्धालु शिव भजनों पर झूमते नजर आए।
हालिया आपदा के बावजूद जम्मू-कश्मीर, भद्रवाह और डोडा समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं के उत्साह में कमी नहीं आई। डल के आसपास सुबह से ही श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही।
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राधाष्टमी पर मणिमहेश की पारंपरिक डल तोड़ने की रस्म भी विधि-विधान से निभाई गई। कार्तिक स्वामी की अगुवाई में संचूई और त्रिलोचन महादेव के वंशजों ने पवित्र डल की परिक्रमा की। कार्तिक स्वामी के चेले से अनुमति मिलने के बाद डल झील तोड़ी गई। दूसरे छोर पर पहुंचे चेलों को श्रद्धालुओं ने कंधों पर उठाकर आसन तक पहुंचाया। मान्यता है कि चेलों को उनके स्थान तक पहुंचाने वाले श्रद्धालु पुण्य के भागी बनते हैं। इसके बाद श्रद्धालुओं ने चेलों से मनवांछित वर का आशीर्वाद लिया। मणिमहेश में राधाष्टमी का यह दृश्य आस्था, परंपरा और शिव भक्ति का अनूठा संगम बना रहा।
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