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Chamba News: गेहूं की पत्तियों में पीले धब्बे दिखाई दें तो करें दवा का छिड़काव

Wed, 04 Feb 2026 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Wed, 04 Feb 2026 10:57 PM IST
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If yellow spots appear on wheat leaves, spray the medicine.
चंबा। जिले में अधिक ठंड और कोहरे की मार से गेहूं की फसल में पीले रतुआ रोग की आशंका को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क किया है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने सलाह दी है कि जब फसल पर इस रोग के धब्बे दिखाई दें तो पत्तियों पर प्रोपिकोनाजोल (टिल्ट 25 ईसी) की 30 मिली मात्रा को 30 लीटर पानी में घोलकर प्रति कनाल छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिन के अंतराल के बाद पुन: छिड़काव करें। इसके अलावा इस रोग के दिखने पर उन पौधों को नष्ट कर दें।
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उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में अभी तक इस गेहूं की फसल पर पीला रतुआ का प्रकोप नहीं दिखाई दिया है, लेकिन किसान सतर्क रहें। पीला रतुआ गेहूं की फसल का एक प्रमुख एवं गंभीर रोग है, जो आमतौर पर दिसंबर के मध्य से जनवरी के पहले पखवाड़े के दौरान दिखाई देना शुरू होता है और अनुकूल परिस्थितियों में फरवरी के अंत तक तेजी से फैल सकता है। अधिक ठंड और अधिक नमी की स्थिति में यह रोग और भी अधिक प्रकोप दिखाता है।
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यदि पीले रतुए को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है। किसान रोग प्रतिरोधक गेहूं की किस्मों का चयन करें। फसल की नियमित निगरानी करते रहें, ताकि प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान हो सके। अधिक जानकारी एवं तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसानों से अपील की गई है कि वे नजदीकी कृषि कार्यालय में कृषि अधिकारियों से संपर्क करें, ताकि फसल को होने वाले नुकसान से समय रहते बचाया जा सके।
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आलू की फसल को कीड़े से इस तरह बचाएं
उन्होंने किसानों को आलू की फसल को कीड़े से बचाने के लिए भी सलाह दी है। किसान आलू की बुवाई से पहले प्रति कनाल 20 मिली क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी को 1 किलोग्राम मिट्टी में मिलाकर खेत में डालें, जिससे कीटों का प्रकोप कम किया जा सके।

यह हैं लक्षण
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस बीमारी में गेहूं की पत्तियों पर पीले रंग की धारियां या चित्तियां दिखाई देती हैं, जिनसे पीले रंग का चूर्ण निकलता है। जब रोग का प्रकोप अधिक हो जाता है तो पत्तियों को हाथ लगाने पर यह पीला चूर्ण कपड़ों पर भी लग जाता है। रोग मुख्य रूप से पत्तियों, तनों और बालियों पर असर डालता है। प्रभावित पत्तियां धीरे-धीरे सूख जाती हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण बाधित होता है और दाने सिकुड़ जाते हैं, परिणामस्वरूप उत्पादन में भारी गिरावट आती है।
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