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Chamba News: हिमकेयर-आयुष्मान कार्ड बने शोपीस, मरीज दवाइयां-सामान खरीदने के लिए मजबूर
Wed, 05 Nov 2025 10:37 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 05 Nov 2025 10:37 PM IST
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चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में मरीजों को हिमकेयर और आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन लोग बाजार से दवाइयां और अन्य उपकरण खरीद कर उपचार करवाने के लिए विवश हैं। लोगाें ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि दवाइयां और उपकरण बाजार से ही खरीद कर लाने पड़ेंगे तो सरकारी अस्पतालों को बंद कर देना चाहिए। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की मानें तो सरकार की ओर से हिमकेयर और आयुष्मान कार्ड के तहत पुरानी देनदारी वेंडरों को नहीं दी है। कंपनियों ने अब मरीजों को सामान देना बंद कर दिया है। मरीजों की सहूलियत के लिए जन औषधि केंद्र से दवाइयां प्रदान करवाई जा रही हैं, लेकिन जन औषधि केंद्र में दवाइयां या अन्य उपकरण न होने पर मरीज बाजार से ही सामान खरीदने को मजबूर हैं।
मेरे परिजन बीमार है। परिवार का आयुष्मान कार्ड बना है, लेकिन कार्ड नहीं चल रहा है। जिस कारण दवाइयों बाजार से महंगे दाम पर खरीद कर लानी पड़ रही है। लच्छी देवी, तीमारदार
एक तरफ सरकार लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य लाभ देने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करती है तो वहीं, दूसरी ओर आयुष्मान और हिमकेयर कार्ड बंद होना उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है। सरकार को यह सुविधा जल्द बहाल करनी चाहिए। सिमो देवी, तीमारदार
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परिवार के सदस्य का ऑपरेशन हुआ। सारा का सारा सामान बाजार से खरीद कर लाना पड़ा। हजारों का खर्चा हुआ है। हेल्थ कार्ड महज शोपीस बन गए हैं। बिंदो देवी, तीमारदार
सरकारी अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर दवाइयां, टेस्ट बाजार में ही करवाने पड़ते हैं। ऐसे में सरकार को इस प्रकार के कार्ड बंद ही कर देने चाहिए। रतनो देवी, तीमारदार
कंपनियों को पांच करोड़ रुपये की देनदारी हो चुकी है। इनकी पेमेंट न होने से कंपनी ने कार्ड अस्वीकार कर दिए हैं। मरीजों की सहूलियत के लिए जन औषधि केंद्र से जो संभव है, वे दवाइयां प्रदान की जा रही है।
डॉ. जालम भारद्वाज, एमएस, मेडिकल कॉलेज चंबा
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मेरे परिजन बीमार है। परिवार का आयुष्मान कार्ड बना है, लेकिन कार्ड नहीं चल रहा है। जिस कारण दवाइयों बाजार से महंगे दाम पर खरीद कर लानी पड़ रही है। लच्छी देवी, तीमारदार
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एक तरफ सरकार लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य लाभ देने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करती है तो वहीं, दूसरी ओर आयुष्मान और हिमकेयर कार्ड बंद होना उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है। सरकार को यह सुविधा जल्द बहाल करनी चाहिए। सिमो देवी, तीमारदार
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परिवार के सदस्य का ऑपरेशन हुआ। सारा का सारा सामान बाजार से खरीद कर लाना पड़ा। हजारों का खर्चा हुआ है। हेल्थ कार्ड महज शोपीस बन गए हैं। बिंदो देवी, तीमारदार
सरकारी अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर दवाइयां, टेस्ट बाजार में ही करवाने पड़ते हैं। ऐसे में सरकार को इस प्रकार के कार्ड बंद ही कर देने चाहिए। रतनो देवी, तीमारदार
कंपनियों को पांच करोड़ रुपये की देनदारी हो चुकी है। इनकी पेमेंट न होने से कंपनी ने कार्ड अस्वीकार कर दिए हैं। मरीजों की सहूलियत के लिए जन औषधि केंद्र से जो संभव है, वे दवाइयां प्रदान की जा रही है।
डॉ. जालम भारद्वाज, एमएस, मेडिकल कॉलेज चंबा