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चम्बा: स्कूल पहुंचने के लिए दो घंटे चलना पड़ रहा पैदल
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चांजू पंचायत के आधा दर्जन गांवों में आज तक नहीं पहुंची सड़क
मरीज को पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाने के लिए मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
चांजू (चंबा)। उपमंडल चुराह की ग्राम पंचायत चांजू के गांव सुंदरी, डिम्ह, रडू, माढ़ी और पुदरोड़ी आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। सड़क के अभाव में छठी से लेकर जमा दो कक्षा तक के विद्यार्थियों को रोजाना दो घंटे पैदल चल कर स्कूल पहुंचना पड़ता है। कई मर्तबा तो बच्चों को घरों तक पहुंचने में शाम हो जाती है। इसके चलते उन्हें घरों में पढ़ाई करने के लिए भी समय नहीं मिल पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में गांवों में यदि कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे पीठ पर उठाकर मीलों पैदल चलकर ही मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इससे कई बार तो मरीज अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही दम तोड़ देते हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों चेत सिंह, रोहित, परस राम, चैन लाल आदि का कहना है कि सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहा कि कई बार राजनीतिक दलों के नेताओं और विभागीय अधिकारियों से गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग उठाई गई बावजूद इसके समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कहा कि मटर और सेब सीजन में उन्हें 300 रुपये प्रति खच्चर भाड़ा अदा कर फसल को सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इससे उनकी आर्थिक हालत भी खराब हो जाती है। कहा कि सुबह बस पकड़ने के लिए उन्हें अंधेरे में ही घर से निकलना पड़ता है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेज कर वास्तुस्थिति का जायजा लेने के बाद ही आगामी प्रयास आरंभ होंगे।
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मरीज को पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाने के लिए मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
चांजू (चंबा)। उपमंडल चुराह की ग्राम पंचायत चांजू के गांव सुंदरी, डिम्ह, रडू, माढ़ी और पुदरोड़ी आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। सड़क के अभाव में छठी से लेकर जमा दो कक्षा तक के विद्यार्थियों को रोजाना दो घंटे पैदल चल कर स्कूल पहुंचना पड़ता है। कई मर्तबा तो बच्चों को घरों तक पहुंचने में शाम हो जाती है। इसके चलते उन्हें घरों में पढ़ाई करने के लिए भी समय नहीं मिल पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में गांवों में यदि कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे पीठ पर उठाकर मीलों पैदल चलकर ही मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इससे कई बार तो मरीज अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही दम तोड़ देते हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों चेत सिंह, रोहित, परस राम, चैन लाल आदि का कहना है कि सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहा कि कई बार राजनीतिक दलों के नेताओं और विभागीय अधिकारियों से गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग उठाई गई बावजूद इसके समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कहा कि मटर और सेब सीजन में उन्हें 300 रुपये प्रति खच्चर भाड़ा अदा कर फसल को सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इससे उनकी आर्थिक हालत भी खराब हो जाती है। कहा कि सुबह बस पकड़ने के लिए उन्हें अंधेरे में ही घर से निकलना पड़ता है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेज कर वास्तुस्थिति का जायजा लेने के बाद ही आगामी प्रयास आरंभ होंगे।
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