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Chamba News: महंगी हुई सब्जियां उगाना, बीज के दाम बढ़े, शिमला से मंगवानी पड़ रही पनीरी
Sun, 08 Jun 2025 04:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 08 Jun 2025 04:26 AM IST
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साहो क्षेत्र में किसानों की ओर से लगाए लाल, पीली शिमला मिर्च के पौधे: किसान
चंबा के साहो, कीड़ी, लग्गा और ओसल क्षेत्रों में होती है टमाटर, बैंगन और शिमला मिर्च की बंपर पैदावार
बाहरी मंडियों में लाल और पीली शिमला मिर्च की भारी मांग, 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा दाम
किसान बोले, पठानकोट के होटलों में जाती है क्षेत्र की लाल और पीली शिमला मिर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। जिले के किसानों को सब्जियों की खेती अब चुनौती बनती जा रही है। जिले में बैंगन, टमाटर और शिमला मिर्च की पनीरी नहीं मिल रही है। इस कारण किसानों को शिमला से महंगे दामों पर मंगवानी पड़ रही है। खासतौर पर शिमला मिर्च की पनीरी सबसे महंगी साबित पड़ रही है। किसानों में प्रदीप कुमार, चुन्नी लाल, भिंदर सिंह, हरीश कुमार, केशव कुमार का कहना है कि अगर सरकार बीज की लागत कम करने और स्थानीय स्तर पर पनीरी उपलब्ध करवाने के लिए ठोस कदम उठाए तो खेती और अधिक लाभकारी बन सकती है। इसके साथ ही यदि मंडियों तक पहुंच और विपणन की व्यवस्था बेहतर हो तो चंबा की सब्जियां देशभर में अपनी पहचान बना सकती हैं।
जिले में दस ग्राम शिमला मिर्च के बीज का एक पैकेट किसानों को लगभग पांच हजार रुपये में मिल रहा है। चंबा के साहो, कीड़ी, लग्गा और ओसल जैसे क्षेत्रों में बैंगन, टमाटर और शिमला मिर्च की अच्छी पैदावार होती है। यहां के किसान लाल और पीली किस्म की शिमला मिर्च बड़े स्तर पर उगाते हैं, जिसे पठानकोट और बाहरी राज्यों की मंडियों में भेजा जाता है। इन मंडियों में किसानों को उनकी मेहनत का उचित मोल मिल रहा है। शिमला मिर्च की कीमत 80 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है। हालांकि बीज, खाद जैसी लागत भी काफी बढ़ चुकी है, लेकिन फिर भी किसानों को इन फसलों से लाभ हो रहा है। यही कारण है कि धीरे-धीरे कई किसान पारंपरिक खेती से हटकर नकदी फसलों और सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।
इनसेट
जो रेट सरकार ने निर्धारित किए हैं। उसी आधार पर ही किसानों को बीज उपलब्ध करवाया जाता है। -डॉ. भूपेंद्र सिंह कृषि विभाग के उपनिदेशक
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बाहरी मंडियों में लाल और पीली शिमला मिर्च की भारी मांग, 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा दाम
किसान बोले, पठानकोट के होटलों में जाती है क्षेत्र की लाल और पीली शिमला मिर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। जिले के किसानों को सब्जियों की खेती अब चुनौती बनती जा रही है। जिले में बैंगन, टमाटर और शिमला मिर्च की पनीरी नहीं मिल रही है। इस कारण किसानों को शिमला से महंगे दामों पर मंगवानी पड़ रही है। खासतौर पर शिमला मिर्च की पनीरी सबसे महंगी साबित पड़ रही है। किसानों में प्रदीप कुमार, चुन्नी लाल, भिंदर सिंह, हरीश कुमार, केशव कुमार का कहना है कि अगर सरकार बीज की लागत कम करने और स्थानीय स्तर पर पनीरी उपलब्ध करवाने के लिए ठोस कदम उठाए तो खेती और अधिक लाभकारी बन सकती है। इसके साथ ही यदि मंडियों तक पहुंच और विपणन की व्यवस्था बेहतर हो तो चंबा की सब्जियां देशभर में अपनी पहचान बना सकती हैं।
जिले में दस ग्राम शिमला मिर्च के बीज का एक पैकेट किसानों को लगभग पांच हजार रुपये में मिल रहा है। चंबा के साहो, कीड़ी, लग्गा और ओसल जैसे क्षेत्रों में बैंगन, टमाटर और शिमला मिर्च की अच्छी पैदावार होती है। यहां के किसान लाल और पीली किस्म की शिमला मिर्च बड़े स्तर पर उगाते हैं, जिसे पठानकोट और बाहरी राज्यों की मंडियों में भेजा जाता है। इन मंडियों में किसानों को उनकी मेहनत का उचित मोल मिल रहा है। शिमला मिर्च की कीमत 80 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है। हालांकि बीज, खाद जैसी लागत भी काफी बढ़ चुकी है, लेकिन फिर भी किसानों को इन फसलों से लाभ हो रहा है। यही कारण है कि धीरे-धीरे कई किसान पारंपरिक खेती से हटकर नकदी फसलों और सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।
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जो रेट सरकार ने निर्धारित किए हैं। उसी आधार पर ही किसानों को बीज उपलब्ध करवाया जाता है। -डॉ. भूपेंद्र सिंह कृषि विभाग के उपनिदेशक